ग्लोबल पावर बनना है तो मसुलमानों से नफरत खत्म करें :पूर्व न्यायधीश

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Chief Justice of India, Shri Justice J.S. Khehar addressing at the event marking introduction of digital filing as a step towards paperless Supreme Court, in New Delhi on May 10, 2017. Photo by Parveen Negi/Mail Today

नई दिल्ली। पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे एस खेहर ने आज अयोध्या विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की और उन्होंने कहा कि भारत ने आजादी के बाद ‘पूर्ण धर्मनिरपेक्षता’ का मार्ग चुना। उन्होंने यहां लाल बहादुर शास्त्री व्याख्यान देते हुए कहा, ‘‘सबसे बड़ी हिंसा तो तब हुई जब देश आजाद हुआ। ऐसी क्रूरता सामने आयी जिसे पीढ़ियां नहीं भूल सकतीं। लेकिन भारत में कुछ अनोखा हुआ। पाकिस्तान इस्लामिक राज्य बना लेकिन भारत ने धर्मनिरपेक्ष रहना पसंद किया।

न्यायमूर्ति केहर ने कहा कि 1947 में विभाजन के दौरान हिन्दुओं और मुसलमानों ने भीषण हिंसा का दंश झेला था। आजादी के बाद भारत जहां धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना, वहीं पाकिस्तान ने इस्लामिक देश बनने का रास्ता चुना था। उन्होंने कहा, भारत के पूर्व नेताओं ने यह सुनिश्चित किया था कि देश में पूर्ण धर्मनिरपेक्षता हो, लेकिन अब हम एक बार फिर इसे भूलने लगे हैं और ‘जैसे को तैसा’ की राह पर बढ़ चले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर कल देर शाम यहां नेहरू संग्रहालय में आयोजित 24वें स्मृति व्याख्यानमाला में उन्होंने कहा, भारत वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है।

पूर्व CJI ने कहा- भारत के नेताओं ने ये तय किया कि देश पूरी तरह सेक्युलर रहेगा। अब हम इसे भूल गए हैं। हम फिर ‘जैसे को तैसा’ के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा- जरा सोचिए, हम सेक्युलर रहकर तो ग्लोबल पावर बन सकते हैं। लेकिन, क्या आप आज की दुनिया में कम्युनल होकर ग्लोवल पावर बन सकते हैं। अगर आप मुस्लिम देशों से अच्छे रिश्ते चाहते हैं तो फिर एंटी मुस्लिम नहीं हो सकते। अगर ईसाई मुल्कों से दोस्ती चाहते हैं तो फिर एंटी-क्रिश्चियन नहीं हो सकते। इसलिए, आज जो कुछ हो रहा है, वो देश के हित में नहीं है।

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