फूलपुर:क्या कांशीराम की हार का बदला लेने में सफल होंगी मायावती ?

0
187

लखनऊ :देश की राजनीतिक ‘राजधानी’ उत्तर प्रदेश की दो हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो गया है. गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों के लिए 11 मार्च को वोटिंग होगी और नतीजे 14 मार्च को आएंगे. गोरखपुर सीट से योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सीट से केशव प्रसाद मौर्य सांसद थे. बाद में योगी के सीएम और केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गईं थीं.अब अटकलें ये लगाई जा रही है कि इस सीट से बीएसपी अध्यक्ष मायावती चुनाव लड़ सकती हैं. ये वही सीट है जहां से साल 1996 के लोकसभा चुनावों में बीएसपी के संस्थापक कांशीराम हार चुके हैं. कांशीराम को समाजवादी पार्टी उम्मीदवार जंग बहादुर पटेल ने 16 हजार वोटों से हराया था. मायावती की बीएसपी ने इस सीट पर अपना खाता 2009 के चुनाव में खोला, जब कपिल मुनि करवरिया ने 30 फीसदी वोट हासिल किए थे.

फूलपुर लोकसभा सीट का इतिहास अपने आप में बेहद खास है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू समेत कई बड़े दिग्गजों ने इस सीट का नेतृत्व किया है. वहीं बीजेपी-बीएसपी के लिए भी ये सीट अहमियत रखता है. साल 1952,1957 और 1962 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस सीट का प्रतिनिधत्व किया था. साल 1962 में नेहरू को टक्कर देने के लिए डॉ राम मनोहर लोहिया उतरे, लेकिन करीब 55 हजार वोटों से हार गए. 1996 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर सीट पर दिग्गजों की लड़ाई में दो पूर्व सांसदों को हारना पड़ा था। पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद फूलपुर से लगातार तीन बार सांसद रहे रामपूजन पटेल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए। रामपूजन चौथे नंबर पर रहे। इसी चुनाव में भाजपा से लड़े पूर्व सांसद बीडी सिंह को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। पूर्व विधायक श्यामसूरत उपाध्याय भी इसी साल फूलपुर सीट से चुनाव लड़े थे।

साल 1952 में जब देश में पहला आम चुनाव होने वाला था तब देश के सबसे बड़े नेता जवाहर लाल नेहरू ने इलाहाबाद के फूलपुर के सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन नेहरू को अपने पहली ही परीक्षा में चुनौती मिली। यह चुनौती किसी नेता ने नहीं बल्कि एक संन्यासी ने दिया, जिनका नाम था प्रभुदत्त ब्रह्मचारी। वे फूलपुर के सीट से ही चुनाव लड़ रहे थे। प्रभुदत्त ब्रह्मचारी का चुनाव लड़ने का एक ही मकसद था हिंदू कोड बिल को पास ना होने देना। लेकिन नेहरू इस चुनाव को जीतने में कामयाब रहे। 1957 में दूसरी बार नेहरू ने इस सीट पर जीत दर्ज की।

पर 1962 में इस सीट पर हुए चुनाव को कोई कैसे भूल सकता है। नेहरू के वीजयी रथ को रोकने के लिए प्रख्यात समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया फूलपुर के सीट से चुनाव लड़ने के लिए कूद पड़े। हालांकि वे नेहरू को कोई खास चुनौती नहीं दे सके। नेहरू ने जीत के साथ हैट्रिक लगा दी।

नेहरू के निधन के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने 1967 के चुनाव में छोटे लोहिया के नाम से प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र को हराकर नेहरू और कांग्रेस की विरासत को आगे बढ़ाया। हालांकि 1967 में संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिध‌ि बनने के बाद विजय लक्ष्मी पंडित को सीट छोड़ना पड़ा।

उसके बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने नेहरू के सहयोगी केशव देव मालवीय को चुनाव में उतारा। लेकिन इस बार वे सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार जनेश्वर मिश्र को नहीं हरा पाए और पहली बार कांग्रेस को इस सीट से हाथ धोना पड़ा।

1971 फूलपुर में कांग्रेस के तरफ से विश्वप्रताप सिंह जीते, वह बाद में जाकर देश के प्रधानमंत्री बने। आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर कमला बहुगुणा की जीत हुई हालांकि यह अलग बात है कि वह बाद में जाकर कांग्रेस मे शामिल हो गईं।

आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी, लेकिन यह सरकार पांच साल तक नहीं चल पाई और फिर 1980 में मध्यावध‌ि चुनाव हुए तो इस सीट पर लोकदल के उम्मीदवार प्रो. बीडी सिंह ने जीत दर्ज की।

1984 में एक बार फिर कांग्रेसी प्रत्याशी रामपूजन पटेल जीते। लेकिन वे बाद में जनता दल में शामिल हो गए। इसके बाद 1989 और 1999 के चुनावों में यहीं से सांसद बने। उन्होंने यहां पर पंडित नेहरू के बाद हैट्रिक लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

2004 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर से बाहुबली नेता अतीक अहमद जीते। उन्होंने तब निर्दलीय चुनाव लड़ा था। लेकिन बाद में अतीक बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। जबकि पहले इस सीट पर बीएसपी के संस्थापक कांशीराम चुनाव हार चुके थे।

आजादी के बाद फूलपुर सीट पर हुए कुल 16 चुनावों व 2 उपचुनावों में कांग्रेस ने 7 बार, एसपी 4 बार, जनता दल 2 बार, सोशलिस्ट समाजवादी पार्टी 1 बार, बीएलडी 1 बार, जनता पार्टी सेक्यूलर 1 बार, बीएसपी सिर्फ 1 बार व बीजेपी एक बार जीत दर्ज कर पाई है।

फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने
1952 पंडित जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस
1957 पंडित जवाहर लाल नेहरू व मसुरियादीन कांग्रेस
1962 पंडित जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस
1964 विजय लक्ष्मी पंडित कांग्रेस
1967 विजय लक्ष्मी पंडित कांग्रेस
1969 जनेश्वर मिश्र समायुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1971 विश्वनाथ प्रताप सिंह कांग्रेस
1977 कमला बहुगुणा भारतीय लोकदल
1980 बीडी सिंह जनता दल सेक्युलर
1984 रामपूजन पटेल कांग्रेस
1989 रामपूजन पटेल जनता दल
1991 रामपूजन पटेल जनता दल
1996 जंग बहादुर सिंह पटेल समाजवादी पार्टी
1998 जंग बहादुर सिंह पटेल समाजवादी पार्टी
1999 धर्मराज पटेल समाजवादी पार्टी
2004 अतीक अहमद समाजवादी पार्टी
2009 कपिलमुनि करवरिया बहुजन समाज पार्टी
2014 केशव प्रसाद मौर्य भारतीय जनता पार्टी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here