जालिम सरकार के खिलाफ बगावत भी इस्लाम धर्म के विरूद्ध हैःमौलाना असगर अली सलफी

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मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द की दो दिवसीय 34वीं आल इंडिया अहले हदीस कांफ्रेन्स का सफलता पूर्वक हुआ समापन

नई दिल्ली :इन्सान की जान अल्लाह की अमानत है उसको बर्बाद करना हराम है और हालात से मजबूर होकर आत्महतया करना महा पाप है लेकिन इससे भी बड़ा पाप यह है कि दूसरों को खत्म करने के लिये अपनी जान को हलाक कर दे। शराब नोशी, खून खराबा, गन्दगी, और प्रदूषण से देश और मानवता को बचाना हमारा कर्तव्य है। यह यथार्थ मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के सम्माननीय अध्यक्ष मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी ने व्यक्त किया महोदय मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द द्वारा आयोजित राम लीला मैदान में  ‘‘विश्व शान्ति और मानवता की सुरक्षा’’ के शीर्षक पर आयोजित 34वीं आल इंडिया अहले हदीस कांफ्रेन्स के दूसरे दिन भरी सभा से संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा की अत्याचार और अधिकार का  हनन और नाइंसाफी अपराध है लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं कि इसके खात्मे के लिये हिंसा और हिंसक प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाये। इस्लाम अम्न व शान्ति का वाहक है वह कानून को हाथ में लेने की कभी इजाज़त नहीं देता। मर्कजी जमीअत अहले हदीस हिन्द इस्लाम की उज्जवल शिक्षाओं पर अग्रसर है कि शासकों की फरमाबरदारी की जाये वह जालिम सरकार के खिलाफ भी प्रदर्शन और बगावत को इस्लाम धर्म के विरूद्ध मानती है।

इमाम मुहम्मद बिन सऊद इस्लामिक यूनीवर्सिटी रियाज के पूर्व प्राध्यापक डा0 अबदुर्रहमान फरेवाई ने अपने अध्यक्षता संबोधन में मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के जिम्मेदारान विशेष रूप से मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी को बधाई देते हुये कहा कि अम्न व शान्ति की अहमियत हर दौर में सर्वमान्य है और अम्न की बात करना और उसको फैलाने की कोशिश करना पूरे समुदाय और मानवता के हित में है इस बारे में हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिये। मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द ने राष्ट्र एवं समुदाय और मानवता को चिराग दिखाने का काम किया है। यह कांफ्रेन्स विश्व शान्ति और मानवता की सुरक्षा के सिलसिले में मील का पत्थर साबित होगी।

मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के महा सचिव मौलाना मुहम्मद हारून सनाबिली ने कहा कि आतंकवाद देश एवं मानवता के लिये बड़ा खतरा और विकास की राह की रूकावट है। यही वजह है कि मर्कज़ी जमीअत हमेशा आतंकवाद और दाइश सहित आतंकी संगठनों के विरूद्ध सक्रिय रही है।

जामिया सिराजुल उलूम के सचिव मौलाना शमीम अहमद नदवी ने कहा इस शीर्षक पर कांफ्रेन्स मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी के स्पष्ट कारनामों में से है। इस्लाम में अम्न व शान्ति की बड़ी अहमियत है जमाअत अहले हदीस इसी अम्न व शान्ति की प्रचारक है।

मौलाना ताहिर हनीफ मदनी रियाज ने कहा कि मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द की यह कांफ्रेन्स बड़ी महत्वपूर्ण है। इसके आयोजन पर पदधारियों को बधाई देता हूं। वास्तव में अम्न व शान्ति एक बड़ी नेमत है ईमान के साथ अम्न की बका और सुरक्षा संभाव है।

प्रादेशिक जमीअत अहले हदीस तमिलनाडो एवं पांडेचेरी के सचिव मौलाना अब्दुल अलीम उमरी ने कहा कि यह एक अच्छी कांफ्रेन्स है। विश्व स्तर पर जो अफरातफरी का माहौल है ऐसे में इसका आयोजन अत्यंत अहम और वक्त की जरूरत है। इसके आयोजन पर बधाई पेश करता हूं।

मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के उपाध्यक्ष हाफिज़ अब्दुल कैयूम ने सम्माननीय अमीर को बधाई देते हुये कहा कि यह कांफ्रेन्स समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और इसका सन्देश परस्पर-स्तित्व और मानवता की सुरक्षा है।

प्रादेशिक जमीअत अहले हदीस हिन्द के अमीर मौलाना अब्दुस्सत्तार सलफी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण कांफ्रेन्स के आयोजन पर मर्कज़ी जमीअत के सभी पदधारियों का शुक्रिया अदा करते हैं और इसमें भाग लेने वाले तमाम लोगों का स्वागत करते हैं।

प्रादेशिक जमीअत अहले हदीस बिहार के सचिव मौलाना इंआमुल हक मदनी ने कहा कि यह कांफ्रेन्स मौजूदा हालात में अत्यंत महत्वपूर्ण है मैं इसके लिये मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के जिम्मेदारान को बधाई देता हूं।

मौलाना सज्जाद हुसैन सचिव जमीअत अहले हदीस पश्चिम बंगाल ने कहा कि अल्लाह ने हमें इस भव्य कांफ्रेन्स में भाग लेने की क्षमता दी और मर्कज़ी अहले हदीस हिन्द ने यह कांफ्रेन्स आयोजित की इसके लिये यह हमारे लिये शुक्रिया की पात्र है।

सांसद अली अनवर ने कहा कि कांफ्रेन्स के आयोजन पर मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के पदधारियों को बधाई देतेा हूं उन्होंने इस शीर्षक पर कांफ्रेन्स को समय की आवश्यकता करार देते हुये कहा कि आज पूरी दुनिया के हालात हर्ष वर्धक नहीं हैं। उच्च आचरण के द्वारा हालात को दुरूस्त किया जा सकता है।

मुस्लिम प्रस्नल्ला के प्रसिद्ध सदस्य कमाल फारूकी ने कहा कि मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के अमीर देश समुदाय और मानवता के हवाले से सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। और जब तक वह मौजूद हैं देश एवं समुदाय का नुकसान नहीं हो सकता। यह कांफ्रेन्स महत्वपूर्ण शीर्षक पर आयोजित हुयी है और मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द ने यह साबित कर दिया है कि देश एवं समुदाय को पेश समस्याओं के समाधान के सिलसिले में वह सदैव चिंतित रहती है इसके लिये मैं मर्कज़ी जमीअत के पदधारियों को बधाई देता हूं।

जमाअत इस्लामी के सचिव मुहम्मद अहमद ने कहा कि मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द बधाई की पात्र है कि महत्वपूर्ण शीर्षक पर ऐसे हालात पर कांफ्रेन्स आयोजित कर रही है जबकि दुनिया को इसकी बड़ी सख्त ज़रूरत है अम्न व शान्ति के लिये इन्साफ ज़रूरी है।

प्रसिद्ध धर्म गुरू पण्डित एन.के शर्मा ने कहा कि अम्न व शान्ति की ज़रूरत केवल मुसलमानों और दलितों को ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र को है और मुहम्मद स0अ0व0 केवल मुसलमनों के ही सन्देष्टा नहीं बल्कि हम सबके धर्म गुरू और सम्माननीय हैं। मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने ऐसे शीर्षक पर जो समय की सख्त ज़रूरत है कांफ्रेन्स आयोजित की और इसमें दाइश और आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया।

आल इंडिया मुस्लिम मज्लिसे मुशाविरत के अध्यक्ष नवेद हामिद ने कहा कि मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी इस कांफ्रेन्स के आयोजन पर बधाई के पात्र हैं। तारीख गवाह है कि जब भी भारत में अम्न की स्थिति खराब हुयी है ओलमा ने आगे बढ़कर अम्न को बहाल किया है।

सांसद मु0 सलीम ने कहा कि पूरी दुनिया में अम्न खतरे में है इस्लाम अम्न का सन्देश है और अम्न का माध्यम भी। अम्न के लिये जरूरी है कि इस्लामी सिद्धांतों को अपनाया जाये मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द को इस कांफ्रेन्स के आयोजन पर बधाई पेश करता हूं।

आल इंडिया अइम्मा मसाजिद संगठन के अध्यक्ष डा0 उमैर इलयासी ने कहा कि मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के तमाम जिम्मेदारान अम्न व इंसानियत के शीर्षक पर कांफ्रेन्स के आयोजन पर बधाई के पात्र हैं आतंकवाद का विरोध सबसे पहले मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द ने किया और इसके लिए मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी बधाई के पात्र हैं।

शैख फाइज़ बिन मुतअब अददैहानी कोयत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण कांफ्रेन्स के आयोजन पर मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी और उनकी टीम बधाई के पात्र हैं। मौजूदा हालात में इसका शीर्षक अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मौलाना अज़हर मदनी डायरेक्टर इकरा गर्लस इंटरनशनल स्कूल ने उनके संबोधन का अनुवाद पेश किया।

एस.एस.टी आयोग के पूर्व सदस्य डाक्टर ताजुददीन अंसारी ने कहा कि मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी ने हमेशा की तरह रामलीला मैदान में इस्लाम के अम्न व मानवता के सन्देश को साधारण करने का सराहनीय प्रयास किया है। मौलाना और मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द हमेशा अम्न की स्थापना में सक्रिय रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण सत्र में मौलाना इनायतुल्लाह मदनी ने ‘‘आत्मघाती हमलों की अवैधता इस्लामी कानून की रौशनी में’, मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी हैदराबाद ने ‘‘शराब बुराइयों की जड़’मौलाना अबू रिज़वान मुहम्मदी ने ‘‘अम्न एक महान नेमत’के शीर्षक पर संबोधित किया।

इन सत्रों में इन ओलामा के अलावा धार्मिक, समाजी और देश की महत्वपूर्ण हस्तियों ने भी संबोधन किया प्रसिद्ध आर्या समाज रहनुमा स्वामी अग्निवेश ने अपने संबोधन में कांफ्रेन्स के आयोजन पर मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के पदधारियों विशेष रूप से मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी को बधाई देते हुए कहा कि आपने शराब को भी कांफ्रेन्स का शीर्षक बनाया उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में ओलामाए किराम और आप जैसे लोगों के इन्हीं कारनामों और फतवे ही की देन है कि हिन्दुस्तान से चन्द लोगों को छोड़कर कोई भी दाइश की गतिविधियों का आल-ए-कार नहीं बन सका।

उत्तराखंण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि नफरत के माहौल में आपने शान्ति और मानवता की बात की है। और निमार्ण एवं विकास का संदेश सुनाने का काम किया है। मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस हिन्द के अध्यक्ष मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी इस सन्देश के लिए बधाई के पात्र हैं। बेशक यह सन्देश जहां तक पहुंचेगा वहां हिन्दुस्तान को फायदा पहुंचायेगा। और भाई चारा को बढ़ावा मिलेगा और हिन्दुस्तान मज़बूत होगा।

शैख अल मुफरिज ने कहा कि हमारे लिए खुशी की बात है कि मर्कजी जमीअत अहले हदीस हिन्द अम्न व मानवता को फैलाने और अल्लाह के सन्देश को साधारण करने के लिये संघर्ष करती है और यह महवपूर्ण कांफ्रेन्स इन्हीं प्रयासों का महत्वपूर्ण भाग है। इनके संबोधन का अनुवाद डा0 जिल्लुर्रहमान तैमी ने किया।

कांफ्रेन्स में  विभिन्न शीर्षकों पर ज्ञान एवं शोध पर आधारित किताबों और पत्रिकाओं का विवोचन महान ओलामा और देश एवं समुदाय के विद्ववानों के हाथों अमल में आया। इनमें दबिस्ताने नजीरिया, तहरीके खत्मे नबूव्वत की 25वीं जिल्द, आयाते नबुव्वत, कुरआन करीम का इंसाइकलोपीडिया, तारीख अहले हदीस दक्षिण हिन्द, पत्रिका इसलाहे समाज का विशेषांक जिसमें दाइश और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक फतवे का नवीनीकरण है, उल्लेखनीय है।इन धार्मिक गुरुओं के साथ साथ अन्य कई बड़े विद्वानों ने भी इस स्टेज से इस्लाम धर्म की सच्ची तस्वीर जनता के सामने पेश की और यह बात  पूरी ताक़त के साथ सभों ने कही के इस्लाम धर्म शांति और प्रेम का पाठ पढ़ाता है। इस धर्म का आतंक और हिंसा से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है बल्कि सब से पहले इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ जिस मुस्लिम संगठन ने फतवा दिया है वह जमीअत अहले हदीस ही है। बतादें की दो दिवसीय इस कांफ्रेंस में देश के कोने कोने से बड़ी संख्या में लोग राम लीला मैदान में जमा हुए थे.कांफ्रेंस सफ़लतपूर्वक अपने समापन को पहुंचा।

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