येरुशलम:जर्मनी ने अमेरिका को खतरनाक परिणामों की चेतावनी दी

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नई दिल्ली :जर्मन विदेश मंत्री ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी तो इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस बारे में बुधवार को कोई बयान दे सकते हैं.जर्मन विदेश मंत्री जिग्मार गाब्रिएल ने मंगलवार को चेताया कि अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से येरुशलम ले जाना कितना खतरनाक हो सकता है. उन्होंने कहा, “येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने से संकट शांत नहीं होगा, बल्कि इसे और बढ़ावा मिलेगा.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखे विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे सकते हैं. अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि बुधवार को राष्ट्रपति इस बारे में घोषणा करेंगे. वैसे यह भी खबरें हैं ट्रंप ने ऐसे कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये हैं जिसके तहत दूतावास को येरुशलम ले जाने में छह महीने का विलंब किया जा सकता है.उधर, फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने बताया कि उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का फोन आया जिसमें उन्होंने दूतावास को येरुशलम ले जाने की योजना के बारे में बताया. फलस्तीनी राष्ट्रपति के प्रवक्ता नबील अबु रुदीनेह ने बताया, “अब्बास ने चेतावनी दी कि (लंबे समय से लटकी पड़ी) शांति प्रक्रिया के साथ साथ क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा और स्थिरता पर इस तरह के कदम के खतरनाक असर पड़ेंगे.इस्राएल ने 1967 के युद्ध के बाद येरुशलम के पूर्वी हिस्से को अपने नियंत्रण में लिया. तब से इस्राएल येरुशलम को अपनी राजधानी के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश करता है. वहीं फलीस्तीनी भी येरुशलम पर अपना दावा करते हैं. फलीस्तीनियों को लगता है कि जब भी उनका एक आजाद देश बनेगा, उस दिन येरुशलम ही उसकी राजधानी होगी. येरुशलम यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों का पवित्र केंद्र है.अरब लीग में शामिल दो दर्जन से ज्यादा देश कह चुके हैं कि वे 12 दिसंबर को इस मुद्दे पर बैठक करेंगे. 57 देशों वाला इस्लामी सहयोग संगठन तो पहले ही अमेरिकी योजना को “नग्न आक्रामकता” करार दे चुका है.अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ना तो कभी येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर स्वीकार किया है और न ही शहर के पूर्वी हिस्से को इस्राएली क्षेत्र में मिलाने का समर्थन किया है.इस बीच, इस्राएली अधिकारी ट्रंप से अपील कर रहे हैं कि वह अपने दूतावास को येरुशलम ले जाने का फैसला करें. इस्राएली रक्षा मंत्री अविगडोर लीबरमान ने व्हाइट हाउस से अपील की है कि वह येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के इस ‘ऐतिहासिक अवसर’ का उपयोग करें. उन्होंने अगले हफ्ते या अगले महीने अमेरिकी दूतावास येरुशलम में होने की उम्मीद जतायी है.लेकिन यूरोप में अमेरिका की इस तरह की योजना का विरोध हो रहा है. जर्मनी के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने भी ट्रंप प्रशासन को याद दिलाया है कि येरुशलम का दर्जा दो राष्ट्रों वाले समाधान के तहत बातचीत के जरिए तय होना चाहिए.

 

 

 

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