कठुआ दुष्कर्म मामले में आज से सुनवाई शुरू, पीड़िता के परिवार वालों ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की।

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Kathua Gangrape Case

(श्रीनगर) : कठुआ दुष्कर्म मामले में आज से स्थानीय अदालत में सुनवाई शुरू होगी। लेकिन पीड़िता के परिवार वालों ने केस की सुनवाई किसी और राज्य में करने की मांग की है। उनका कहना है की जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम को जिस तरह से वकीलों के एक समूह ने जिला अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने से रोकने की कोशिश की थी, उसे देखते हुए केस में निष्पक्ष्ता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे सुप्रीम कोर्ट से केस की सुनवाई किसी और राज्य में करना हमारे लिए बेहतर है। पीड़ित पक्ष की वकील दीपिका सिंह ने कहा, “हमें नहीं लगता कि कठुआ में ट्रायल के लिए ठीक माहौल है. इसीलिए हम केस को जम्मू-कश्मीर से बाहर ले जाने की मांग करने जा रहे हैं।

Protest against rape cases

हालाँकि अधिकारियों ने कहा कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक चार्जशीट को सुनवाई के लिए सत्र अदालत के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग नामजद हैं। गौरतलब है की नाबालिग आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे, क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष अदालत है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है और दोनों ही सिख हैं

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उधर बलात्कार और हत्या के आरोपियों के समर्थन में रैलियां निकालने वाले जम्मू बार एसोसिएशन का कहना है कि वो क्राइम ब्रांच की जांच से संतुष्ट नहीं है. ये वकील पिछले 12 दिन से हड़ताल पर हैं और इनकी मांग है कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए. बार एसोसिएशन के प्रभारी गगन बसोत्रा ने कहा है, ‘ हम क्राइम ब्रांच की जांच से बिलकुल भी संतुष्ट नहीं हैं, 221 गवाह हैं, चालान में. अभी और जांच करनी बाक़ी है, जांच में कई ख़ामियां हैं.’

Lawyer Deepika Singh Rajawat

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल को जम्मू बार एसोसिएशन तथा कठुआ बार एसोसिएशन को आड़े हाथ लिए जाने के बाद अब सुनवाई सुचारू ढंग से चलने की उम्मीद जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ वकीलों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

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वहीं दूसरी तरफ पीड़िता की वकील दीपिका सिंह राजावत ने भी अपने प्रति आशंकाओ को ज़ाहिर किया है। दीपिका का कहना है की ऐसे माहौल में सुरक्षा की बात करना बेमानी है, रेप या हत्या जैसी अप्रिय घटना मेरे साथ भी हो सकती है। इस लिए मै चाहती हूँ की केस को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर किया जाये ताकि एक बेहतर माहौल में निष्पक्ष्ता के साथ केस की सुनवाई हो सके।

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