मक्‍का मस्‍जिद ब्‍लास्‍ट केस का गुनहगार कोई नहीं,क्या खुद से हुए थे धमाके?

0
55

नई दिल्ली :2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट के मामले में आज NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुना दिया है। सबूतों के आभाव में NIA ने स्वामी असीमानंत समेत सभी पाचों आरोपियों को बरी कर दिया है। स्वामी आसीमानंत इस केस का प्रमुख आरोपी था। असीमानंत ने इस केस में अपना गुनाह कबूल भी कर लिया था लेकिन फिर वो अपने बयान से पलट गया था। और आज आखिर में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए स्वामी को बरी कर दिया है। मक्का मस्जिद ब्लास्ट में आरोपियों के बरी होने के बाद भगवा आतंकवाद पर राजनीति गरमा गई है.

बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले पर कांग्रेस से माफी मांगने को कहा है.बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, आज कांग्रेस के चेहरे से मुखौटा उतर गया है. कांग्रेस जिस प्रकार से हिन्दू आंतकवाद के नाम पर हिन्दू धर्म को बदनाम कर तुष्टिकरण की राजनीति करने का काम कर रही थी, उसका आज पर्दाफाश हो गया है.इसके साथ ही संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीती कर रही है. कोर्ट के फैसले पर बीजेपी प्रतिक्रिया नहीं देती.

बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस से सवाल किया, क्या राहुल गांधी इंडिया गेट पर क्षमा याचना के लिए रात 12 बजे आएंगे? दूसरी तरफ स्वामी असीमानंद समेत पांच आरोपियों को बरी किए जाने पर एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि न्याय नहीं हुआ है.NIA की विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहने पर दक्षिणपंथी हिंदू समूह अभिनव भारत के सभी पांचों सदस्यों को दोषमुक्त करार दिया है.

बता दें कि 18 मई 2007 को प्रसिद्ध चारमीनार के पास जुमा की नमाज के दौरान मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे. इस घटना के बाद मस्जिद के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग में पांच और लोगों की मौत हुई थी.आरोपियों के एक वकील ने नामपल्ली आपराधिक अदालत परिसर के बाहर संवाददाताओं से कहा कि अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को साबित करने में विफल रहा है.

धमाके में अपनों को खोने वालों में रियाज खान भी एक हैं। रियाज के दादा का निधन हो गया था, ऐसे में उनके पिता यूसुफ खान और साले शफीक-उर-रहमान उस दिन मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। लेकिन, वे दोनों वापस घर कभी नहीं लौटे। एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में सोमवार (16 अप्रैल) को स्‍वामी असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के एक दिन पहले ही रियाज ने इंसाफ मिलने की उम्‍मीद जताई थी।

उन्‍होंने कहा था कि वह इस बात को लेकर आश्‍वस्‍त हैं कि ऊपर वाला दोषियों को सजा जरूर देगा। मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट के वक्‍त रियाज 19 साल के थे। उनके पिता यूसुफ घर में एकमात्र कमाऊ व्‍यक्ति थे। वह ऑटो चालक थे, जिनकी कमाई से परिवार का खर्चा चलता था। पिता के धमाके में मारे जाने के बाद रियाज के कंधों पर अचानक से एक विधवा बहन, दो छोटे भाई और एक छोटी बहन की जिम्‍मेदारी आ गई थी।

इसके कारण उन्‍हें नौवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी। एनआईए की विशेष अदालत ने 11 साल बाद 16 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुनाया। रियाज ने कहा, ‘पिता के निधन के बाद जिंदगी की जद्दोजहद में इस कदर उलझा कि हादसे के 11 साल बीत गए इसका विश्‍वास नहीं होता।’

बता दें कि हैदराबाद के पॉश इलाके और ऐतिहासिक चारमीनार के पास स्थित मक्का मस्जिद में 18 मई, 2007 को जुमे के दिन दोपहर करीब एक बजे सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी। हैदराबाद पुलिस की शुरुआती जांच के बाद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई अधिकारियों ने उस वक्त 68 चश्मदीद की गवाही दर्ज की थी। इनमें से 54 गवाह बाद में कोर्ट में अपनी गवाही से मुकर गए। इसके बाद 2011 में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया था। एनआईए ने मामले में कुल दस लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें असीमानंद के अलावा अभिनव भारत के सदस्य भी शामिल थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here