9 महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लिए मंत्रालय की कुर्सी पर बैठे हैं मोदी के मंत्री एम जे अकबर

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नई दिल्ली :’मी टू कैंपेन’ के चलते कई महिलाओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर मुश्किल में पड़ते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से उन्हें नाइजीरिया दौरे को जल्द खत्म कर गुरुवार तक वापस लौटने को कहा गया है। मीटू कैंपेन के तहत कई महिलाओं ने उन पर तमाम मीडिया संस्थानों में संपादक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। पिछले तीन दिन में उन पर 9 महिलाएं आरोप लगा चुकी हैं। उधर, अभिनेता आलोक नाथ पर अब अभिनेत्री संध्या मृदुल और फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की एक क्रू मेंबर ने यौन शोषण के आरोप लगाए। एक दिन पहले ‘तारा’ सीरियल की राइटर-प्रोड्यूसर ने उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

अकबर पर लगातार लग रहे आरोपों के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार से उनके इस्तीफे की मांग की है.पत्रकार गजला वहाब ने एम जे अकबर द्वारा यौन शोषण की उस समय की कहानी बयां की है, जब वो 1994 में अंग्रेजी अखबार ‘द एशियन एज’ में कार्य करती थीं और अकबर इस अखबार के संपादक थे. गजला ने बताया है कि किस तरह वे अकबर की लेखनी से प्रभावित थीं और पत्रकार बनना चाहती थीं. लेकिन पत्रकार के तौर सीखने से पहले उनके भ्रम को टूटना था. गजला ने 1997 के उन 6 महीनों का जिक्र किया है जब अकबर ने उन्हें अपने केबिन में बुलाकर उनके साथ अश्लील हरकतें की.

बुधवार को एक अंग्रेजी अखबार की स्थानीय संपादक सुपर्णा शर्मा ने आरोप लगाया है कि 1990 में अखबार की लॉन्चिंग के मौके पर अकबर ने उनके साथ बदसलूकी और आपत्तिजनक हरकत की थी। सुपर्णा के अनुसार, तब वह एमजे अकबर की टीम का हिस्सा थीं। एशियन एज अखबार में रही एक पत्रकार वह सातवीं महिला है, जिन्होंने एमजे अकबर पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एक मैगजीन की इस कार्यकारी संपादक ने 1997 के एक वाकये का जिक्र करते हुए एक ब्लॉग में लिखा- अकबर ने मेरी डेस्क अपने केबिन के ठीक बाहर शिफ्ट करा दी थी। जब भी उनके केबिन का दरवाजा खुलता, मेरा उनसे आमना-सामना होता था। वे अपनी डेस्क पर बैठकर पूरे वक्त मुझे घूरते रहते थे।

वे अक्सर मुझे केबिन में बुलाकर निजी बातें करते थे। कई बार वे अपना वीकली कॉलम लिखते वक्त मुझे सामने बैठा देते थे ताकि कोई शब्द ढूंढना हो तो निचले ट्रायपॉड पर रखी डिक्शनरी में झुककर मैं उसे देख लूं।बता दें की प्रधानमंत्री मोदी ने न तो एमजे अकबर को बर्ख़ास्त किया है और न ही एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. न ही अकबर के बचाव में कोई मंत्री आया है. न ही अकबर के लिए बीजेपी का कोई प्रवक्ता सामने आया है. दरअसल किस्सा ही ऐसा सामने आया है कि उसके सामने कोई सामने नहीं आ रहा है.

मुबशिर जावेद अकबर मध्यप्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं तो वहां से भी कोई सामने नहीं आया है. एमजे अकबर भी अपने बचाव में अभी तक सामने नहीं आए हैं. उनका सामने आना ज़रूरी है, क्योंकि कई महिला पत्रकारों ने ऐसे प्रसंग सुनाए जिन्हें पढ़कर उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा. अकबर के सामने न आने से सरकार पर भी आंच आ रही है. उम्मीद है वे जल्दी सामने आएंगे और कुछ कहेंगे. किस पत्रकार के बारे में क्या धारणा है, मेरी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जब कुछ महिला पत्रकारों ने संदर्भ और प्रसंग के साथ ब्योरा लिखा तो लगा कि अब अकबर की बात होनी चाहिए. मैंने कोई जल्दबाज़ी नहीं की. सोमवार के दिन भी रूका कि एक दिन ठहर कर देखते हैं फिर इस पर बात करेंगे. तो अपनी तरफ से जितना चेक सिस्टम हो सकता है हमने पालन किया।

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