सलमान की बात मान गए राहुल गांधी,आज मुसलमानों के लिए सजेगा कांग्रेस का दरबार

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नई दिल्ली: 2019 के आम चुनावों से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिलने का फैसला किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की पहल पर बुधवार (11 जुलाई) यानी आज नई दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ राहुल गांधी राउंड टेबल डिस्कशन करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक इसमें मुस्लिम समुदाय के प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, बॉलीवुड से जुड़े लोग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। हालांकि, कौन-कौन इसमें शामिल होगा, इसकी लिस्ट काफी गोपनीय रखी गई है। राउंड टेबल की इस चर्चा में तकरीबन बीस लोगों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि, गेस्ट लिस्ट को काफी सीक्रेट रखा जा रहा है. लेकिन संभावना है कि जावेद अख्तर, सैय्यदा हमीद जैसी शख्सियत इस बैठक में होंगी, जिसमे राहुल गांधी मुस्लिम समाज की परेशानियों से रूबरू होंगे. इसके अलावा पार्टी बुद्धिजीवी वर्ग से कैसे कनेक्ट करे, ये भी एजेंडा में शामिल रहेगा.


राहुल गांधी आम चुनाव से पहले सभी समाज के लोगों से मुलाकात कर रहे हैं. लेकिन 2014 के चुनाव के बाद कांग्रेस ने जिस तरह से दूरी मुस्लिमों से बनाई थी, उसके बाद से पार्टी की तरफ से ये औपचारिक पेशरफ्त है. इससे पहले राहुल गांधी ने जून में रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया था. राहुल गांधी चाहते हैं कि मुस्लिम समाज के लोगों को विश्वास दिलाया जाए कि वो अकेले नहीं हैं बल्कि कांग्रेस उनके साथ है. कांग्रेस मॉइनॉरिटी की लड़ाई लड़ती रहेगी. हालांकि, बुद्धिजीवी वर्ग से राहुल गांधी के मुलाकात का मतलब है कि इस वर्ग से पार्टी संवाद कायम करने की जरूरत ज्यादा समझ रही है. इस वर्ग के ज़रिए मुस्लिम तबके को कांग्रेस से जोड़ने की कोशिश है. कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन नदीम जावेद का कहना है कि इस तरह की बैठक से वो आगाह नहीं हैं लेकिन ये कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा है.

कांग्रेस सभी धर्मों और वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है. इस प्रोग्राम के सूत्रधार पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद हैं, जो लोगों को राहुल गांधी से मिलने के लिए बुला रहे हैं.कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद ने कहा कि चूंकि बीजेपी हमेशा देश को तोड़ने की राजनीति करती रही है इसलिए अब कई मोर्चों पर तैयार होना होगा. राहुल इन बुद्धिजीवियों के मुलाक़ात से कुछ बेहतर चीज़ ही निकालेंगे. सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ज़ोया हसन, जावेद अख़्तर सरीखे बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात कर सकते हैं.बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी न केवल मुस्लिम समुदाय की परेशानियों से रू-बरू होंगे बल्कि इस समुदाय के बीच कैसे फिर से कांग्रेस के प्रति लगाव पैदा किया जाए, इस पर भी चर्चा होगी। बता दें कि 2014 के आम चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने एंटनी कमेटी बनाई थी.

जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस अति अल्पसंख्यकवाद की वजह से हारी है। इसके बाद कांग्रेस ने धीरे-धीरे मुस्लिमों से दूरी बनाते हुए सॉफ्ट हिन्दुत्व की राजनीति शुरू कर दी। गुजरात और कर्नाटक विधान सभा चुनावों के वक्त राहुल गांधी न केवल जनेऊधारी हिन्दू बने नजर आए बल्कि मंदिरों और मठों में माथा टेकते भी नजर आए। राहुल गांधी भगवान शिव के उपासक भी बनते नजर आए लेकिन अब चूंकि बात आम चुनाव की है, ऐसे में मुस्लिम समुदाय को साथ लिए बिना कांग्रेस की खिचड़ी पकनी मुश्किल होगी।

लिहाजा, कांग्रेस ने पिछले महीने रोजा इफ्तार का आयोजन कर इस बात के संकेत दे दिए थे कि राहुल गांधी फिर से मुस्लिम समुदाय का विश्वास हासिल करना चाहते हैं साथ ही उन्हें यह विश्वास भी दिलाना चाहते हैं कि कांग्रेस उनके हक की लड़ाई लड़ती रहेगी।दरअसल राहुल गांधी इस बैठक के ज़रिए मुस्लिम समाज में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहते हैं. साथ ही इन मुस्लिम बुद्धिजीवियों से इस बात को लेकर भी चर्चा करेंगे कि कैसे चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण को रोका जाए? राहुल इन लोगों से मिली राय को अपनी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल करेंगे.

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