50 करोड़ से ज्यादा का लोन लेना होगा मुश्किल,नए क़ानून का एलान

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नई दिल्ली : हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के पीएनबी को 12,600 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की चपत लगाने के बाद जांच एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर रही हैं. दूसरी तरफ सरकार भी ऐसे कदम उठा रही हैं जिससे कि भविष्य में इस तरह की चूक न हो. अब देश के बैंकों को लेकर वित्त मंत्रालय ने बैंकों को आदेश जारी किया है. वित्त मंत्रालय ने बैंकों को किसी भी बड़े फ्रॉड से बचाने के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज वालों को पासपोर्ट नंबर उपलब्ध कराने का नियम बनाया है. इसके पीछे वित्त मंत्रालय का मानना है कि इससे फ्रॉड किए जाने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई हो सकेगी.इससे पहले, केंद्रीय कैबिनेट से फ्यूजिटिव इकनॉमिक ऑफेंडर्स बिल को हरी झंडी मिल चुकी है।

साथ ही, बैंकों को 250 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन की निगरानी करने का भी आदेश दिया गया है। दरअसल, बड़ा कर्ज लेकर देश छोड़कर भाग जाने की घटनाओं से सरकार समेत पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी से चिंतित सरकार आर्थिक अपराधियों को देश में रोकने की विस्तृत योजना बना रही है। इन कदमों को इसी मेगा प्लान के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि कोई व्यक्ति डिफॉल्टर होने पर देश छोड़कर भाग न सके। नीरव मोदी, विजय माल्या और मेहुल चोकसी फिलहाल देश छोड़कर भाग गए हैं। मोदी और चोकसी के बारे में अभी जांच एजेंसियों को यह भी नहीं पता है कि ये दोनों कौन से देश में हैं।

वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आदेश में सभी सरकारी बैंकों से कहा गया है कि अगर बकाएदार के पास पासपोर्ट नहीं है तो फिर उस व्यक्ति से डिक्लेरेशन के तौर पर सर्टिफिकेट लेना होगा। बहरहाल, पासपोर्ट की जानकारी मिलने से बैंकों को समय रहते कार्रवाई करने और धोखाधड़ी करनेवालों को देश से भागने से रोकने के लिए सबंधित अथॉरिटीज को सूचना देने में मदद मिलेगी। फाइनैंशल सर्विसेज सेक्रटरी राजीव कुमार ने ट्वीट किया, ‘साफ-सुथरी और उत्तरदायी बैंकिंग की दिशा में अगला कदम। 50 करोड़ रुपये से ज्यादा लोन के लिए पासपोर्ट डीटेल्स अनिवार्य कर दिए गए। यह फर्जीवाड़े की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

 

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