कांग्रेस का मुस्लिम प्रेम कहीं राहुल के लिए हानिकारक न हो जाए

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात की, जिसमें इतिहासकार इरफ़ान हबीब, पूर्व आईएएस एमएस फारुक़ी समेत कई मुस्लिम बुद्धिजीवी मौजूद थे. मुलाक़ात का मक़सद मुसलमानों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श बताया गया. हालांकि कांग्रेस पर एक बार फिर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया जा रहा है.गांधी के साथ करीब दो घंटे की इस संवाद बैठक में इतिहासकार इरफान हबीब, सामाजिक कार्यकर्ता इलियास मलिक, कारोबारी जुनैद रहमान, ए एफ फारूकी, अमीर मोहम्मद खान, वकील जेड के फैजान, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट फराह नकवी, सामाजिक कार्यकर्ता रक्शांदा जलील सहित करीब 15 लोग शामिल हुए।इनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद भी मौजूद थे।

बैठक के बाद खुर्शीद ने संवाददाताओं से कहा, ”कई वकीलों, इतिहासकारों और विश्वविद्यालयों से जुड़े बुद्धिजीवियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की और कई मुद्दों पर चर्चा की। वे जिन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं उसके बारे में कांग्रेस अध्यक्ष को अपना फीडबैक दिया।खुर्शीद ने कहा, ”आशा है कि भविष्य में इस तरह की और बैठकें होंगी।” कांग्रेस अध्यक्ष के साथ संवाद बैठक में शामिल एक व्यक्ति ने बताया, ”राहुल गांधी ने हमसे खुलकर बातचीत की और मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों के बारे में जाना और देश की वर्तमान राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थिति के बारे में हमारे साथ अपने विचार साझा किए।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ इस बैठक में मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने सलाह दी कि पार्टी को कम्यूनिटी की नहीं, बल्कि पावर्टी की बात करनी चाहिए.

क्योंकि जब कांग्रेस कम्यूनिटी की बात करती है तो विरोधियों को सवाल उठाने का मौका मिल जाता है. इन बुद्धिजीवियों का कांग्रेस अध्यक्ष से कहना है कि कांग्रेस में सिर्फ 4 फीसदी दाढ़ी टोपी वाले मुस्लिमों की बात होती है जो हलाला, ट्रिपल तलाक जैसे सनसनीखेज मुद्दे उठाते हैं. लेकिन 96 फीसदी मुसलमानों के वही मुद्दे हैं जो बाकी देश के मुद्दे हैं जैसे गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा. जिसके बाद राहुल गांधी ने भी माना की कांग्रेस से गलती हुई है.कांग्रेस की इस बात को लेकर भी आलोचना हो रही है कि आख़िर सेकुलरिज्म की बात करने वाली पार्टी धर्म के आधार पर बुद्धिजीवियों को क्यों बांट रही है. कांग्रेस की सफाई है कि जिस तरह से उसके नेता दलित और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधियों से मिलते रहे उसी तरह से मुसलमानों से मिले हैं.

आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा.आलोचना करने वालों के दावे में दम है की जो पार्टी सेकुलरिज्म की बात करती है वही पार्टी एक समुदाय विशेष से स्पेशल मुलाक़ात क्यों करती है। एक बड़ा सवाल यह है किया कांग्रेस को इस का फायदा मिलेगा ,चूँकि माना यह जा रहा है की कांग्रेस मुस्लिम से जितना क़रीब होने का दिखावा करेगी हिन्दू उतने उनसे दूर होते चले जाएंगे और अधिक संख्या यहाँ हिन्दुओं की है इस लिए राहुल गांधी का ऐसा करना कांग्रेस के लिए उल्टा भी पड़ सकता है।

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