क्यों बार बार स्मृति ईरानी से छीन ली जाती है मंत्रालय की कुर्सी ?

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नई दिल्लीःमोदी के कैबिनेट में सब से अधिक बार अगर किसी की कुर्सी बदली गई है तो वह स्मृति ईरानी है। सड़क दुर्घटना में किसी मासूम की मौत हो या फिर किसी कपड़े के शोरूम में खुद का स्टिंग हो,एक समय की मानव संसाधन मंत्री रहीं स्मृति ईरानी छात्र नेता रोहित वेमुला या कन्हैया के प्रसंग में ही विवादों में नहीं रहीं बल्कि मंत्रालय के सफर में हर मोड़, हर महफिल में ‘मिस ईरानी’ गलत कारणों से सुर्खियों में बनी रहीं।

आपको बता दें कि, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की आत्महत्या का मामला भी ईरानी ने ऐसे हैंडल किया था कि लखनऊ में पीएम मोदी को भी पहली बार अपने विरोध में नारे सुनने को मजबूर होना पड़ा।यही समय था जब ईरानी विवाद के चरम की तरफ बढ़ने लगी थी , इस बीच यूनिवर्सिटी से जर्मन भाषा हटाने के विवाद ने हालात को और भी गंभीर बना दिया। हालात यहां तक पहुंच गया कि जर्मन एंबेसी में भी इस मुद्दे की सरगर्मी दिखने लगी। इस बीच जेएनयू विवाद ने तो हालात को किस कदर संवेदनशील बना दिया था, शायद बताने की जरूरत नहीं है सभी अच्छी तरह से वाकिफ होंगे।

इसी प्रकार एचआरडी मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद ईरानी इंटर पास की फर्जी डिग्री को लेकर विवादों में घिरी रहीं। इसके बाद आईआईएम और आईआईटी विवाद को लेकर वह सुर्खियों में बनी रहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय केे कुलपति से झगड़े को लेकर भी उनकी खूब फजीहत हुई। यहां तक कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को जेएनयू और शांतिनिकेतन विश्वभारती में वीसी की नियुक्ति को लेकर एचआरडी मंत्री का हित सधता दिखा तो उन्होंने ईरानी के करीबी वीरेंदर सिंह चैहान के बजाय जगदीश सिंह को जेएनयू के वीसी पद के लिए चुना था।

ऐसे ही एक और मामले में, भारत के सबसे बड़े स्टाॅक ब्रोकर या कहें कि शेयर दलाल राकेश झुनझुनवाला के साथ भी स्मृति ईरानी के नजदीकियां जगजाहिर हैं। दरअसल, अरबपति भाईयों राकेश और राजेश झुनझुनवाला स्मृति ईरानी के फैमिली फ्रेंड् हैं। राकेश झुनझुनवाला की पत्नी रेखा के बेहद करीब मानी जाने वाली ईरानी के पति ने तो रेखा से 1.75 करोड़ का लोन भी लिया था, जिसका जिक्र ईरानी की एफिडेविट यानी शपथ-पत्र में भी किया गया था। खबरों की मानें तो ईरानी ने झुनझुनवाला परिवार का एहसान चुकाने के एवज में राजेश की बेटी नुपूर झुनझुनवाला को एचआरडी मंत्रालय में नौकरी पर रखा और सुर्खियों में आ गईं। मंत्रालय में इन्होने इतना विवाद पैदा कर दिया था के मोदी सरकार ने मज़बूर हो कर इस मंत्रालय से निकाल कर कपड़ा मंत्री का पद दे दिया था ,लेकिन वहीँ इनको काम करने में मज़ा शायद नहीं आ रहा था इस लिए इन्हे सुचना प्रशारण मंत्रालय की कुर्सी पर बैठा दिया गया था लेकिन यहाँ आते इस मंत्रालय में विवाद साथ ले आई।


यही कारण है की स्मृति ईरानी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मुक्त कर दिया गया.स्मृति ईरानी का यह कार्यकाल भी विवादों से घिरा रहा था. उनके स्थान पर राज्यवर्धन राठौड़ को सूचना प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है. अभी तक राठौड सूचना प्रसारण राज्य मंत्री थे. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य मंत्री राठौड़ को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है. यह दूसरा मौका है जब स्मृति ईरानी से कोई प्रमुख मंत्रालय वापस लिया गया है. इसके पहले उनसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय वापस ले लिया गया था तथा उन्हें कपड़ा मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था. वह कपड़ा मंत्री बनी रहेंगी.

लेकिन बड़ा सवाल यह है की ईरानी से यह मंत्रालय वापस लेने के मुख्य कारण किया हैं. माना यह जारहा है की इनके आने के साथ ही यह मंत्रालय सुर्ख़ियों में आगया और फिर फिर सुर्ख़ियों में ही बना रह गया ,हर रोज़ कोई न कोई नया विवाद जन्म लेता रहा जिसके कारण सब की नज़र ईरानी पर टिक गई।


सब से हंगामा वाला फैसला स्मृति ईरानी का यह था की उन्होंने फेक न्यूज़ देने वाले पत्रकारों के खिलाफ कड़े दिशा निर्देश जारी कर दिए जिसे बाद में पीएम मोदी ने खुद रोक दिया।इस को लेकर भी स्मृति ईरानी चर्चे में रहीं।
राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह को ले कर हुए विवाद से भी मंत्रालय विवाद में रहा। जहाँ एक तरफ राष्ट्रपति नाराज़ हो गए वहीँ पच्चास से अधिक विजेताओं ने पुरस्कार लेने से इंकार कर दिया। चूँकि यह फैसला मंत्रालय ने लिया था की केवल 11 पुरस्कार ही राष्ट्रपति अपने हाथ से देंगे ,यह निर्णय एक दिन पहले लिया गया जिस से राष्ट्रपति भी नाराज़ हुए और लोगों ने आने से इंकार भी कर दिया। जिस के कारण यह मंत्रालय काफी विवाद में रहा।
आए दिन मंत्रालय के अफसरों का तबादला कर दिया करती थीं जिस से लोगों को काम करने में दिक़्क़त हो रही थी। साथ ही साथ इन्होने फंड भी रोक रखा था जिसका खुलसा पिछले दिनों प्रसार भर्ती के चेयरमैन ए प्रकाश सूर्य ने किया। इस के बाद भी कई अहम फैसले हैं जिनके कारण यह मंत्रालय पूरी तरह से विवादों में रहा और स्मृति ईरानी विवादों की रानी बनी रहीं।

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