मोदी सरकार ज़मीन पर फेल,सर्वे में पास ,ऐसा कैसे ?

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नई दिल्ली :हिंदुस्तान में ग़रीबी ,भुख्मरी अपने चरम पर है। किसान आत्महत्या तेज़ी के साथ कर रहे हैं ,महंगाई आसमान छू रही ,ऐसा कोई हिस्सा नहीं है जहाँ भारत की तस्वीर बदली हुई नहीं हो। छात्रों को सस्ती शिक्षा नहीं मिल रही ,अन्य सुविधाएं तो दूर की बात ,युवाओं को रोज़गार नहीं मिल रहे हैं। वह दर दर भटक रहे हैं ,उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी आठ से दस हज़ार की नौकरी करने पर मज़बूर हैं.किसान रोज़ प्रदर्शन कर रहे हैं ,हर वर्ग के लोग सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ नाराज़गी दिखा रहे हैं फिर ऐसे में कोई सर्व यह बताता है की मौजूदः सरकार के काम काज से संतुष्ट होने वालों की संख्या अधिक है तो फिर ऐसे में इन समस्त समस्याओं को एक तरफ रख कर परखेंगे तो फिर इस प्रकार के सर्वे बहुत हलके मालूम होंगे और यह शक होगा के कहीं यह फेक सर्वे तो नहीं है।

दरअसल बात यह है की इन दिनों एक सर्वे जारी हुआ है जिसमे मोदी सरकार के काम काज से 56 प्रतिशत लोगों को संतुष्ट बताया जा रहा है। कम्यूनिटी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म लोकल सर्किल्स के सर्वे में हर 10 में से 6 लोगों का मानना है कि मोदी ने अपने वादे पूरे करने में कामयाब रही. सर्वे में शामिल लोगों में तीन चौथाई ने भारत की पाकिस्तान के खिलाफ नीति का समर्थन किया है. सर्वे के मुताबिक 54% लोग मानते हैं कि टैक्स टेररेज़म घटा है और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना सफल रही है.

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 56% लोग मान रहे हैं कि मोदी सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए सही ट्रैक पर जा रही है. हालांकि पिछले साल इसी सर्वे में 59% लोगों की यही राय थी. यानी एक साल में तीन प्रतिशत की गिरावट आई है. 2016 में यही आंकड़ा 64% यानी सरकार की विश्वसनीयता में लगातार कमी आ रही है.सर्वे में मोदी सरकार को सबसे बड़ी राहत जीएसटी और नोटबंदी के मोर्चे पर मिली है. 32 प्रतिशत लोगों का कहना है कि जीएसटी के बाद उनका रोजमर्रा का खर्च घटा है. 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ.सर्वे का एक आंकड़ा 2019 से पहले प्रधानमंत्री मोदी के माथे पर चिंता बढ़ा सकता है. सर्वे में शामिल लोगों ने शिकायत की कि सांसद अपने क्षेत्र में समय नहीं दे रहे हैं.

सर्वे में साफ़ तौर पर लिखा हुआ है की 56% लोग मान रहे हैं कि मोदी सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए सही ट्रैक पर जा रही है.अब ऐसे में दो चार मुख्य वादों को भी देख लिया जाए। मोदी जी का पहला वादा था काला धन वापस लाना और हर व्यक्ति के खाते में पंद्रह पंद्रह लाख डालना। इस वादे का किया हुवा आप सब अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं। आज तक न काला धन वापस आया और ना है आम जनता के खाते में पंद्रह लाख आए ,और राजनीती ऐसी हुई के खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को यह कहना पड़ा की यह चुनावी जुमला था,

दूसरा वादा था युवाओं को हर साल दो करोड़ रोज़गार देने का ,लेकिन सच्चाई यह है की मुश्किल से एक साल में दो लाख युवाओं को भी मोदी सरकार रोज़गार नहीं दे पाई है और अब चार साल से अधिक हो गए हैं। यानी यह वादा भी चुनावी जुमले की नाव पर सवार हो कर निकल गया।

तीसरा सब से बड़ा वादा था पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना का। लेकिन शपथ ग्रहण से लेकर पठान कोर्ट एयरबेस हमले से होते हुए नवाज़ शरीफ की नवासी की शादी तक हर जगह पीएम मोदी पाकिस्तान को गले लगाए रहे और पाकिस्तान हर रोज़ हमारे ऊपर हमला करता रहा ,हमारे जवानों की जो संख्या मोदी सरकार में शहीद हुई है उतनी पहले कभी नहीं हुई थी ,और आज भी हमारी सरकार पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए तैयार नहीं है।

एक और वादे को याद कर लीजिये ,यह वादा था महंगाई कम करने का। महंगाई को लेकर उस समय अरुण जैटली ,राजनाथ ,सुषमा स्वराज ,स्मिर्ति ईरानी और अन्य भाजपा के नेता जंतर मंतर पर खूब प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन आज वही महंगाई सीधे दो गुनी हो गई तो कोई पूछने वाला नहीं है। कोई भी ऐसा छेत्र नहीं है जिसमे महंगाई का असर नहीं देखने को मिला हो।यही कारण है की आज आम जनता बहुत आसानी के साथ दो समय का अच्छा खाना नहीं खा पाता है,चूँकि महंगाई ने उनके जेब पर ऐसा हमला किया है की वह अब मुश्किल से अच्छा सामान खरीद पाता है।

अब ऐसे में यह बड़ा प्रश्न है की अगर सब कुछ ठीक नहीं है तो फिर सर्वे में सब सही क्यों दिखाया जा रहा है ,और अगर सब सही है तो फिर बेरोज़गारी की मार झेलने वाले युवा ,आत्महत्या करने वाले किसान ,प्रदर्शन करने वाले लोग और महंगाई की मार यह सब का सब झूट है। अब आप खुद फैसला कर सकते हैं की सर्वे का आधार किया हो सकता है और क्या इसे माना जा सकता है।

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