भाईजान का एक्शन या बीइंग ह्यूमन ? कामयाबी की नई सीढ़ी।

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Tiger Zinda hai

सलमान खान अपनी फिल्म टाइगर ज़िंदा है के सहारे तीसरी बार 300 करोड़ रूपये की कमाई वाले बॉक्स ऑफ़िस क्लब में प्रवेश करने वाले हैं। धीमी गति से शुरुआत करने के बावजूद फिल्म अब 300 करोड़ से बस 20 करोड़ रूपये दूर है। फिल्म के नेट कलेक्शन की बात करें तो फिल्म अब तक 280 करोड़ 62 लाख रूपये की कमाई कर चुकी है। यानि 300 करोड़ के क्लब में शामिल होने के लिए अब महज़ 19 करोड़ 38 लाख रूपये चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी की कमाई के मामले में सलमान खान की ‘टाइगर जिंदा है’ ने हिंदी सिनेमा की दो सबसे बड़ी फिल्में ‘बाहुबली-द कन्क्लूजन’ और ‘दंगल’ को भी पीछे छोड़ दिया है। लेकिन ख्याल रहे यहां हम ‘बाहुबली’ और ‘दंगल’ की ओवरऑल कमाई नहीं बल्कि रिलीज के दूसरे सोमवार के कलेक्शन की बात कर रहे हैं।

Tiger Zinda hai

फिल्म की ख़ास बात करें तो “टाइगर ज़िंदा है” कटरीना कैफ के साथ एक्शन सीरीज़ को आगे बढ़ाने वाली फिल्म “एक था टाइगर” का सीक्वल है। “एक था टाइगर” की कहानी की थीम जहाँ भारत और पाकिस्तान के दो जासूस (रॉ और आई-एस-आई एजेंट) सलमान खान और कटरीना कैफ के बीच प्यार के तड़के से बनाई गई थी वहीँ “टाइगर ज़िंदा है” में सीरिया के शहर एक्रीट (असल नाम तुकृत) में आंतकवादिओं के चंगुल में फंसे 40 नर्स (25 भारतीय और 15 पाकिस्तानी) को ज़िंदा और सही सलामत निकाल लाने की कहानी है। जिसके लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया जाता है। फिल्म की शुरुआत सीरिया में काम करने वाली उन नर्सों से होती है जो भारत और पाकिस्तान की रहने वाली हैं। अचानक कुछ ऐसा घटता है की जिसके बाद आतंकी सरगना अबू उस्मान के द्वारा उन नर्सों को उन्ही के हॉस्पिटल में बंदी बना लिया जाता है। जिसके बाद उन्हें बचाने की प्रकिर्या के तहत टाइगर की तलाश शुरू होती है। टाइगर और ज़ोया फिल्म में पति पत्नी के रोल में हैं जो आस्ट्रिया के शहर इन्सब्रुक में अपने बेटे के साथ आराम की ज़िन्दगी बिता रहे होते हैं। चिनॉय (RAW का चेयरमैन) उन्हें तलाश कर लेता है और इस मिशन के लिए टाइगर को तैयार कर लेता है। टाइगर इस मिशन को अपने चुने हुए साथियों के साथ पूरा करता है। वहां पहुँचने के बाद टाइगर को मालूम होता की 25 नर्सों के साथ 15 और नर्सें हैं। यह नर्सें पाकिस्तानी है इस लिए टाइगर को इन्हे बचाने की ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती और न ही इनके बारे में बताया जाता है। इन 15 नर्सों को बचाने के लिए ज़ोया (ISI एजेंट) भी वहां पहुंच जाती है और इस तरह दोनों मिल कर इस मिशन को पूरा करते हैं। अंत में टाइगर अपने एक दोस्त की कुर्बानी दे कर इन नर्सों को वहां से सही सलामत बाहर निकाल लाता है फिर टाइगर और ज़ोया इन सबसे दूर अपनी दुनिया में चले जाते हैं।

Tiger Zinda Hai

ये थी फिल्म की सपाट सी कहानी। लगती ज़रूर है सपाट, लेकिन फिल्म में बहुत कुछ है देखने को। कुछ नहीं तो भाईजान का एक्शन तो देखना बनता है और भाभीजान।।।।।।।।।। भाभीजान का भी एक्शन कमाल का है। दोनों की जोड़ी और कमाल के एक्शन ने लोगों को थिएटर की तरफ खिंच ही लिया। फिर कोई लाख खान की फिल्मों का बहिष्कार करे। या कोई बेबी-बेबी और अवार्ड एयरलिफ्ट करे या गांव-गांव घूम कर टॉयलेट-टॉयलेट ही क्यूँ ना चिल्लाये। भाई, भाईजान की फिल्म है तो चाहने वाले आ ही जायेंगे। और सिर्फ फैन फोल्लोविंग की ही बात नहीं है। बात तो आतिफ असलम की ख़ूबसूरत आवाज़ की भी है। जिन्होंने कच्ची डोरियों से ही सही हर नाराज़गी को कागज़ी कर दिया और अपने चाहने वालों के दिल से गल कर गये। इसके साथ ही अच्छी लोकेशन, अच्छी सिनेमेटोग्राफी और स्वाग से स्वागत भी तो किया गया है। इन सब के बीच फिल्म हलके फुल्के अंदाज़ में काफी कुछ कह जाती है। कुछ ऐसा जिनसे इन दिनों की पूरी राजनीती पटी हुई है। वैसे अमेरिका की भी काफी फजीहत की गयी है। ये भी तो देखना बनता है।

कहते हैं कला और साहित्य सरहदों के बंधन में कहाँ बंधते हैं। वाकई इस फिल्म को देख कर ऐसा लगा की कला के ज़रिये सरहदों की दीवारों को तोडा जा रहा है। फिल्म की जो सबसे ख़ास बात है वो रॉ और आई-इस-आई का एक साथ मिल कर काम करना है और एक मिशन के पूरा होने पर दोनों देशों के झंडे का एक साथ लहराना है। दोनों टीमों (रॉ और आई-इस-आई टीम) के बीच देशभक्ति को लेकर थोड़ी झड़प भी होती है। लेकिन दोनों के बीच इस तरह सुलह हो जाती है जैसे दो बच्चे आपस में किसी छोटी सी चीज़ को ले कर लड़ रहे हों। वाकई कहीं ऐसा तो नहीं भारत और पाकिस्तान दोनों एक ऐसी चीज के लिए बच्चो की तरह लड़ रहे हैं। लेकिन असल में लड़ाई ऐसी हो रही है जिसका खामियाज़ा आम नागरिक को बड़े स्तर पर भुगतना पड़ रहा है। राजनेताओं का क्या है वो तो जब चाहे बिरयानी और मुर्ग मुसल्लम तोड़ने अचानक ही पाकिस्तान पहुँच जाते हैं। फिल्म की जो बात मुझे पसंद नहीं आयी वो ये की वही टिपिकल फार्मूला जहाँ मिशन के अंत में टीम के किसी एक सदस्य का मरना लाज़मी हो जाता है। वो भी तब जब मिशन लगभग पूरा होने को हो और वो महज़ एक कवर (तुम जाओ मै इन लोगों को संभाल लूंगा) देने में बेचारा शहीद कर दिया जाता है। पता नहीं क्यूँ लेखक पटकथा में ऐसी स्तिथी पैदा कर देता है। तकलीफ होती है यार। और दूसरी ये की, बस करो यार हॉलीवुड को कॉपी करना। कुछ ओरिजनल भी शूट कर लिया करो। फिल्म में सलमान का मैसिव मशीन गन (MG 42) का चलाने वाला सीन Dwayne Johnson की कॉपी मालूम होती है। कैटरीना का सलमान को किस करना भी दीपिका और Vin Diesel के एक सीन की कॉपी मालूम होती है। खैर, खैर से सारी नर्सें (एक को छोड़ के, बेचारी को कहानीकार ने बीच में ही मार डाला) सही सलामत वापस अपने घर को चली जाती है और भाईजान और भाभीजान अपने जूनियरजान के साथ अपनी दुनिया में लौट जाते हैं।

Tiger Zinda vs XXX

अभिनय की बात की जाये तो भाईजान तो हमेशा से भाईजान ही रहे हैं लेकिन कहीं कहीं सज्जाद डेल्फरोज़ (अबू उस्मान) अपने भाईजान पर भारी पड़ते नज़र आये हैं। लेकिन वही कहानीकार की नाइंसाफी, इतने अच्छे और दमदार किरदार (विलेन) को चुटकी में भाईजान के हाथों मार गिरवाया। वैसे सज्जाद डेल्फरोज़ ईरानी अदाकार हैं और वहां बहुत सक्रीय और अच्छे अभिनेता माने जाते हैं। थिएटर से उनका ताल्लुक है और कई सीरियल में काम कर चुके हैं। मंझे हुए कलाकार हैं। फिल्म में अबू उस्मान के किरदार में काफी अच्छा अभिनय उन्होंने किया है। कैटरीना की अदाकारी की बात की जाये तो सिर्फ उनका एक्शन ही सामने आता है। एक्शन सीन में काफी अच्छा दिखी है और शायद यही वजह है की एक्शन के बीच में कैटरीना का अभिनय कहीं दब कर रह जाता है। परेश रावल के लिए यही कहा जा सकता है की “ऑलवेज गुड” …. फियर फैक्टर और खतरों के खिलाडी के बाद “अंगद बेदी” को इस फिल्म में देखना अच्छा लगा। स्टनर हैं अच्छा स्टंट करते हैं। फिल्म में भी काफी अच्छा एक्शन किया है। अदाकारी कुछ ज़्यादा नहीं कर पाए। “अनुप्रिया गोयनका” की अदाकारी फिल्म में काफी अच्छा देखने को मिला है। नर्स के रोल में इन्होने अच्छा काम किया है।

चलते चलते यह भी याद कर लें की साल 2012 में “एक था टाइगर” रिलीज़ हुई थी। अब इसके दूसरे भाग यानि “टाइगर ज़िंदा है” में सलमान खान और कटरीना कैफ के अलावा सज्जाद डेलफरोज़ , परेश रावल , गिरीश कर्नाड, अंगद बेदी, नेहा हिंगे , नवाब शाह, कुमुद मिश्रा और अनुप्रिया गोयनका ने भी काम किया है।

by: Imran Ahmad

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