आधी रात को अब्दुल मजीद को दी गई फांसी

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बांग्लादेश ने 1975 के तख्तापलट में शामिल होने के मामले में सेना के एक पूर्व कैप्टन को फांसी दे दी है। इसी तख्तापलट में बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या कर दी गई थी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार अब्दुल मजीद को शनिवार रात स्थानीय समयानुसार 12 बजकर एक मिनट पर केरानीगंज में ढाका सेंट्रल जेल में फांसी पर लटका दिया गया।
जेलर महबूब उल इस्लाम ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या में शामिल अब्दुल मजीद को फांसी पर लटका दिया गया है. बताया जाता है कि पिछले 25 सालों तक भारत में छुपे रहने के बाद उसे मंगलवार को ही ढाका से गिरफ्तार किया गया था. शुक्रवार को मजीद की पत्नी और चार अन्य रिश्तेदारों को उससे दो घंटे के लिए मिलने की इजाजत दी गई थी. इससे पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने मंगलवार को उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी. ​दया याचिका खारिज होने के बाद इस बात के कयास लगाए जाने लगे थे कि अब्दुल मजीद को जल्द ही फांसी हो सकती है.
अभियोजन पक्ष के वकील के अनुसार माजिद फरारी के दौरान करीब 23 साल कोलकाता में छिपकर रहा था। वह पिछले महीने की 15 या 16 तारीख को ढाका पहुंचा जहां उसे सेना की पुलिस ने पिछले मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को उसकी पत्नी और चार रिश्तेदारों ने जेल में उसके साथ करीब ढाई घंटे मुलाकात की। इससे एक दिन पूर्व बांग्लादेश के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्दुल हामिद ने माजिद की दया याचिका ठुकरा दी थी। ढाका के जिला और सत्र न्यायाधीश हेलालुद्दीन चौधरी ने कोरोना वायरस फैलने के कारण चल रही छुट्टी के दौरान उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत के बाद डेथ वारंट जारी किया था।

 

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