आलोक वर्मा का छलका दर्द ,तोड़ी चुप्पी,कह दी बड़ी बात

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नई दिल्ली:आखिरकार आलोक वर्मा सीबीआइ के निदेशक नहीं रहे। भ्रष्टाचार के आरोप के बाद 77 दिन की जबरन छुट्टी पर भेजे गए वर्मा एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआइ में वापस लौटे थे, लेकिन कोर्ट ने ही यह भी साफ कर दिया था कि अंतिम फैसला चयन समिति ही करेगी। समिति ने निदेशक पद से हटाने का फैसला सुना दिया। समिति के सदस्य को तौर पर प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के तौर पर आए जस्टिस सीकरी ने एक मत से हटाने का फैसला लिया। जबकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया। वर्मा को बाकी बचे 21 दिनों के कार्यकाल के लिए फायर सर्विस का महानिदेशक बना दिया गया है। वर्मा की अनुपस्थिति में सीबीआइ निदेशक का कार्यभार संभालने वाले एम नागेश्वर नए निदेशक की नियुक्ति तक कार्यवाहक निदेशक के रूप में काम संभालेंगे।

अपने साथ हुए इस व्यवहार पर वर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करने वाली महत्वपूर्ण एजेंसी होने के नाते सीबीआई की स्वतंत्रता को सुरक्षित और संरक्षित रखना चाहिए.वर्मा ने कहा, ‘‘इसे बाहरी दबावों के बगैर काम करना चाहिए. मैंने एजेंसी की अखंडता को बनाए रखने की पूरी कोशिश की, जबकि उसे बर्बाद करने की कोशिश की जा रही थी. इसे केन्द्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी अधिकार क्षेत्र के दिए गए थे और जिन्हें रद्द कर दिया गया.’’ वर्मा ने ‘‘अपने विरोधी एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए झूठे, निराधार और फर्जी आरोपों’’ के आधार पर समिति की ओर से तबादले का आदेश जारी किए जाने को दुखद बताया.
बता दें की सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आलोक वर्मा को मोइन कुरैशी और अन्य के मामले की जांच बंद करने के लिए सतीश बाबू साना ने 2 करोड़ रुपये की घूस दी. आलोक वर्मा ने सीबीआई की जांच से IRCTC मामले के मुख्य आरोपी राकेश सक्सेना को बचाने की कोशिश की. इसके अलावा सीबीआई डायरेक्टर के पद पर रहते हुए आलोक वर्मा ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर तलाशी अभियान नहीं लेने का निर्देश भी जारी किया था.सीवीसी ने मामलों को गंभीर मानते हुए आलोक वर्मा को तीन बार नोटिस भेजा और दस्तावेजों को पेश करने को कहा. हालांकि सीबीआई की तरफ से दस्तावेजों को पेश करने के लिए तारीख बढ़ाने की अपील की गई. इसके बाद सीवीसी ने मामले की तारीख 14 सितंबर 2018 से टालकर 18 सितंबर 2018 कर दी थी.

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