अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर लगी एक और बड़ी पाबंदी

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नई दिल्ली :अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने सर शाह सुलेमान हॉल के पुरुष छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को कमरे से बाहर निकलने के समय शॉर्ट ड्रेस और चप्पल नहीं पहनने के लिए कहा है. छात्रों को महत्वपूर्ण मौकों और विश्वविद्यालय के समारोहों में काली शेरवानी पहनने की सलाह दी गई है.लड़के के ड्रेस पर आपत्ति जताते हुए छात्रावस के अधीक्षक ने यह आदेश दिया कि कोई भी लड़का छात्रावस से बाहर निकलते वक्त हवाई चप्पल, शार्ट कुर्ता पायजामा या बरमूडा नहीं पहनेगा. अगर कोई छात्र यहां से बाहर निकलता है तो उसे शर्ट पैंट, काली शेरवानी और जूते पहनने होंगे. छात्रावास के इस अधीक्षक के बाद कई छात्र संगठन जोरदार विरोध कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि हम छात्रावास में क्या पहनेंगे इसका फैसला कोई कैसे कर सकता है.

हम क्लास में नहीं है अपने कमरे में हैं और हमें कहीं जाना है तो हमारा ड्रेस छात्रावास अधीक्षक तय नहीं कर सकते. विवाद बढ़ता देख विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा, छात्रावास ने आदेश नहीं दिया सिर्फ एक गाइडलाइन जारी की गई है. यह पूरी तरह से छात्रों की इच्छा पर निर्भर करता है. दूसरी तरफ छात्रों का दावा है कि वार्डन के हस्ताक्षर के साथ जारी आदेश में इसे अनिवार्य बताया गया है. बताया जा रहा है कि छात्रावास के वॉर्डेन द्वारा एक लिखित आदेश में नए विद्यार्थियों के लिए पूरी गाइडलाइन जारी की गई है। इस गाइडलाइन में विद्यार्थियों को हॉस्टल के कमरे से बाहर निकलने की स्थिति में शॉर्ट ड्रेस, बरमूडा, कुर्ता-पायजामा और हवाई चप्पल ना पहनने के निर्देश दिए गए हैं।

गाइडलाइन के अनुसार, छात्रावास में रहने वाले सभी छात्रों को कमरे से बाहर निकलने के वक्त शर्ट पैंट, काली शेरवानी और जूते पहनने का निर्देश है, जिसपर विश्वविद्यालय के छात्रों और कई संगठनों ने आपत्ति जताई है।इस विवाद पर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि छात्रावास द्वारा सिर्फ एक गाइडलाइन जारी की गई है.

और यह ऐच्छिक है। हालांकि वॉर्डन के हस्ताक्षर के साथ जारी आदेश में इसे अनिवार्य बताया गया है। जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि छात्रावास वॉर्डन द्वारा बनी गाइडलाइन विश्वविद्यालय की परंपरा और संस्कृति को ध्यान में रखकर जारी की गई है। वहीं कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय का आदेश एक बार फिर यह साबित करने को पर्याप्त है कि अलीगढ़ अब भी जमींदारी की व्यवस्था से आजाद नहीं हो सका है।

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