मोदी सरकार की तरफ से जनता के लिए उछाला गया जुमला नंबर 2

0
36

नई दिल्ली :(रहमत कलीम )हमारा मानना है की जब कोई पार्टी सत्ता में आती है और आते ही अपना किया हुआ वादा सब भूल जाती है तो इस से बड़ा धोका उस पार्टी की तरफ से जनता के लिए और कुछ नहीं हो सकता। इस लिए यह हर पार्टी के अनिवार्य है की जो कुछ वह जनता के लिए वास्तव में कर सकती है वही वादे करे, उसी का ख्वाब दिखाए ,चूँकि जब जनता से किया हुवा वादा आप तोड़ते हैं तो आप सिर्फ वादा ही नहीं तोड़ते बल्कि उनका दिल भी तोड़ते हैं,इनका विश्वास भी तोड़ते हैं ,उनकी उम्मीदों को भी तोड़ते हैं और उनके ख़्वाबों को भी तोड़ने का काम करते हैं। ऐसे में हमें ऐसी समस्त राजनीती पार्टियों का गरिबांन पकड़ना चाहिए जिन्होंने अपने वादे के सहारा हमारा वोट जीता था,पत्रकारिता के बदलते दौर में अब ज़रूरी हो गया है की सत्ता के चाटुकारिता का पर्दा फाश हो और जो सच है उसको जनता के सामने लाया जाए। आज मीडिया सत्ता के क़रीब और सत्य से दूर होने का सफल प्रयास कर रहा है,और वहीँ सत्ता संभाले लोग इस चीज़ से भली भांति अवगत हैं की मीडिया ने अगर हमारा साथ दिया तो झूट पर खड़े हमारी कुर्सी के स्तंभ कुछ दिन और काम कर सकते हैं.यही कारण है की सत्ता मीडिया को खुश रखने का कोई मौक़ा अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहती,और मीडिया भी दिन रात सरकार का गुण गाने में कोई कमी नहीं करता।मुनव्वर राणा का एक शेर याद आरहा है

हुकूमत मुंह भराई के हुनर से खूब वाक़िफ़ है वह हर कुत्ते के आगे शाही टुकड़ा डाल देती है

ऐसी परिस्तिथि में समाचार जगत के छोटे छोटे माध्यमों की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है की वह सच्चाई को सामने लाने लिए कठिन परिश्रम करे। यही कारन है की हमने एक नई पहल की है और सरकार के वादे का हिसाब किताब लेने के लिए एक नई सीरीज शुरू की है। जब तक सरकार के किए हुए वादे पुरे नहीं हो जाते तब तक हम उसे जुमला ही कहेंगे ,इसी लिए हमने इस सीरीज का नाम ”जुमला सीरीज ” रखा है। इस के तहत हम केंद्र सरकार के किये हुए हर उस वादे की सचाई बताने की कोशिश करेंगे जिस की ज़मीनी हक़ीक़त कुछ भी नहीं है। यह प्रोग्राम किसी एक पार्टी या सरकार को टारगेट करने के लिए नहीं है बल्कि केंद्र में जो भी सरकार हो उनके किये हुए वादे का हिसाब किताब हम इसी सीरीज में लेते रहेंगे और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा चाहे केंद्र की सरकार बदले या न बदले इस से हमारा कोई सरोकार नहीं है ,हमरा काम सिर्फ आइना दिखाना है ,चाहे सामने में आप हों या कोई और ……..


आज हमारा विषय होगा काला धन का सफ़ेद सच :आप सभी को अच्छी तरह याद होगा की 2 नवम्बर, 2014 को अपने मासिक रेडियो वार्ता के दौरान, प्रधानमंत्री ने हमारे देश के लोगों को यह आश्वासन दिया कि उनकी सरकार विदेशी बैंकों में अवैध रूप से जमा किये गये धन का एक-एक पैसा वापस लायेगी। उन्होंने माना कि वह धन हमारे देश के मेहनतकशों का है। साथ ही साथ, उन्होंने यह भी कहा कि न तो उनकी सरकार को और न ही भूतपूर्व सरकार को यह पता है कि स्विस बैंकों में कितना “काला” धन जमा है।लोक सभा चुनावों के अभियान के दौरान, भाजपा ने यह प्रचार किया था कि स्विस बैंकों में जमा “काला” धन लगभग 1400 अरब डालर (8.4 लाख करोड़ रुपये) है। भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर यह आरोप लगाया था कि वह “काला” धन वापस लाने में गंभीरता नहीं दर्शा रही है। उसने वादा किया था कि सत्ता में आने के सौ दिन के अंदर सारा “काला” धन वापस ले आयेगी। लेकिन बड़ी बात यह है की सरकार में आने के 100 दिन के अंदर ही में मोदी सरकार ने कह दिया की हमने 100 दिन में काला धन लाने का वादा कभी नहीं किया था। बल्कि इसका तात्पर्य यह था कि कार्रवाई 100 दिनों के भीतर की जाएगी। हालांकि विपक्ष ने इन्हीं 100 दिनों को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश जारी रखी।

2014 में उस समय के भाजपा के संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कालेधन पर सदन में हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा था ‘हम इतने नासमझ नहीं हैं कि हम सौ दिनों के भीतर सारा काला धन वापस लाने की बात कहेंगे।उन्होंने यह प्रतिक्रिया विपक्ष के इन आरोपों की पृष्ठभूमि में की जिनमें आरोप लगाया गया था कि भाजपा नेताओं ने सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर काला धन वापस लाने का वादा किया था। विपक्ष ने सवाल उठाया था कि 100 दिनों का वादा करने वाली सरकार के सत्ता में आए छह महीने बीत चुके हैं।क्या 100 दिन पुरे नहीं हुए। खैर राजनीती में शब्दों का खेल बहुत होता है और आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता ही रहता है, हाँ जनता को बेवक़ूफ़ बनाने का कोई मौक़ा कोई भी पार्टी नहीं गंवाती। समझने और समझाने वाली बात यह है की अगर मोदी सरकार ने 100 दिन का वादा न भी किया था तो भी यह वादा तो ज़रूर किया था के विदेश में जमा काला धन ज़रूर वापस लाएगी। लेकिन चलिए आपने 100 दिन दिया ,हम 200 दिन देते हैं ,उसमे भी नहीं आया ,500 दिन दे कर देख रहे हैं उसमे भी कहीं चुपके से भी मोदी सरकार काला धन वापस लाती नज़र नहीं आ रही है। कुछ और दिन दे कर देख लीजिये।

तो फिर लीजिए हज़ार दिन दिया लेकिन फिर भी काला धन नहीं आया। लेकिन एक बड़ी खबर मोदी सरकार ने ज़रूर सुनवा दी और खबर यह थी की स्विस बैंक में भारतीयों का जमा काला धन 50% बढ़ गया है। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन 50 फीसदी बढ़ गया है। हालांकि इसी आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान में 2017 में स्विस बैंकों में काला धन 21 फ़ीसद कम हुआ है।पिछले चार सालों में पहली बार स्विस बैंक में जमा धन बढ़ कर एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपये) के दायरे में पहुंच गया है। यानी कि शुरुआत के तीन सालों के मुक़ाबले चौथे साल में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50% अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपए (1.01 अरब फ्रेंक) पर पहुंच गया है।हालांकि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले तीन साल बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी।

स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के सालाना आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रेंक ( लगभग 4500 करोड़ रुपए) रह गया। यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी।एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन 2017 में लगभग 6891 करोड़ रुपए (99.9 करोड़ फ्रेंक) हो गया। वहीं प्रतिनिधियों या धन प्रबंधकों के जरिए रखा गया धन इस दौरान 112 करोड़ रुपए (1.62 करोड़ फ्रेंक) रहा।


अब सोचने वाली बात यह है की मोदी सरकार के इस वादे की सच्चाई क्या रह गई ,बात हुई थी काला धन वापस लाने का ,लेकिन मोदी सरकार ने तो उलटा ही कर दिया। काला धन वापस लाने का वादा था लेकिन विदेश और मोटा काला धन मोदी सरकार ने जमा करवा दिया। अब आप और हम इसे क्या कहेंगे ,क्या यह भी मोदी सरकार का बड़ा जुमला नहीं निकला। क्या दूसरे वादों की तरह यह वादा भी आपको जुमले के सैलाब में बहता हुआ नज़र नहीं आ रहा है।

जी हाँ मोदी सरकार ने एक और बड़ा जुमला देश की जनता के लिए उछाला था जिस पर आम जनता ने विश्वास किया और आज सिर्फ धोखा खाने को मिला और सब से बड़ी बात मोदी सरकार की तरफ से काला धन वापस लाने के वादे के बारे में यह है की मोदी सरकार को शयद यह अंदाजा था के इस जुमले से हम और आप बेवक़ूफ़ ज़रूर बन जाएंगे ,इसी लिए उन्होंने यह जुमला चुनाव में उछाला था और आज वह कामयाब हो गए अपना जुमला उछाल कर और हम नाकाम रह गए विश्वास कर के। राजीनति में अगर सब कुछ ऐसा ही रहा तो लोग राजनेताओं के वादों पर भरोसा करना छोड़ देंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here