श्री श्री रविशंकर के पत्र ने मचाया तूफ़ान,मध्यस्थता पर हो सकता है घमासान

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नई दिल्ली : अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता के लिए के लिए पैनल में शामिल आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के नाम पर आपत्ति जताईजा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता के लिए तीन सदस्यीय एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएफ कलीफुल्लाह, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं। इस पैनल की अगुवाई जस्टिस कलीफुल्लाह करेंगे। एआईएमआईएम नेता ने कहा कि ‘यह ज्यादा बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट उनकी जगह किसी तटस्थ व्यक्ति को पैनल में शामिल किया होता।’

उन्होंने श्रीश्री रविशंकर के पुराने बयान को इसका आधार बनाया. श्रीश्री रविशंकर ने कहा था कि अगर मुस्लिम अयोध्या पर अपना हक नहीं छोड़ते हैं, तो भारत सीरिया बन जाएगा. ओवैसी ने कहा कि बेहतर होता कि कोर्ट किसी निष्पक्ष व्यक्ति को नियुक्त करती. मध्यस्थता समिति में जाने-माने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर भी शामिल हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर इससे पहले भी व्यक्तिगत स्तर पर अयोध्या मामले को सुलझाने की पहल कर चुके हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके अलावा, वह कश्मीर में शांति के लिए भी व्यक्तिगत तौर पर पहल कर चुके हैं। श्रीश्री रविशंकर के देश-विदेश में करोड़ों अनुयायी हैं। उन्होंने 1981 में आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना की थी। श्री श्री रविशंकर सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी जाने जाते हैं।

अब एक बड़ी खबर यह आ रही है की रवि शंकर ने मध्यस्ता बनाए जाने के बाद से ही अपना काम करना शुरू कर दिया है।उन्हे कल मध्यस्ता के लिए चयनित किया गया और कल शाम में ही उन्होंने ने मुस्ल्मि पक्षःकारों के नाम तीन पेज का एक लेटर तैयार कर के भेज दिया है। लेटर में साफ़ यह कहा जा रहा है की वह मुसलमानों से यही कहना चाह रहे हैं की वह अपनी ज़मीन राम मंदिर के लिए दे दीजिए।

यानी श्री श्री पहले से ही मन बना चुके हैं की वह राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के बारे में बात नहीं करेंगे बल्कि एक पक्ष यानी मंदिर को ले कर अपना काम करेंगे और मुसलामनों से कहेंगे की वह अपनी ज़मीन हिन्दुओं की धार्मिक भावना को समझते हुए भाईचारे की बड़ी मिसाल क़ायम करने के लिए तोहफे में दे दे ,ताकि वहां भव्य राम मंदिर का नर्माण हो सके। सीधी सी बात यह है की वह राम मंदिर के लिए कोशिश कर रहे हैं ,मध्यस्ता के लिए नहीं। पूरा पत्र आप भी पढ़िए और अंदाज़ा लगाइये की श्री श्री रविशंकर प्रसाद की मंशा क्या है।

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