बिहार के बाद असम में भाजपा से अलग हुवा सहयोगी दल

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गुवाहाटी: सिटीजनशिप संशोधन विधेयक पर असम गण परिषद (अगप) ने राज्य में सत्ताधारी भाजपा से अपना समर्थन वापस ले लिया है। अगप के अध्यक्ष और मंत्री अतुल बोरा ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है। पूरे पूर्वोत्तर में लोगों और संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है। पूर्वोत्तर के छात्र संगठनों ने क्षेत्र में मंगलवार को विधेयक के विरोध में बंद रखने का फैसला लिया है।बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के 14 और 1 निर्दलीय का समर्थन भी भाजपा को असम की 126 सदस्यीय असेंबली में अगपा के 14 सदस्य हैं। हालांकि ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से सर्बानंद सोनेवाल की सरकार को कोई खतरा नहीं है। असम में भाजपा के 61 विधायक हैं और उसे बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के 14 और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के यहां 25 और आल इंडियन यूनाइटेड फ्रंट के 13 विधायक हैं।

सोनेवाल सरकार में अतुल बोरा के साथ असम गण परिषद के 3 मंत्री शामिल हैं। संसद में उसका कोई सदस्य नहीं है। भाजपा से उसका गठबंधन 2014 के चुनाव से पहले हुआ था। एक टीवी चैनल से बोरा का कहना था कि तभी साफ कर दिया गया था कि इस बिल पर वह भाजपा का साथ नहीं देंगे। उन्हें पहले बताया गया था कि नरेंद्र मोदी अवैध प्रवासियों के मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। बोरा ने कहा कि अब लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ।पार्टी के तीन मंत्री और एक वरिष्ठ नेता सोमवार को दिल्ली गए थे। प्रधानमंत्री से मिलने का समय अभी तक नहीं मिल सका। उसके बाद उनकी मुलाकात गृहमंत्री राजनाथ सिंह से हुई। मुख्यमंत्री सोनेवाल ने तो उनसे मिलने से भी मना कर दिया। बोरा का कहना है कि वे इस मसले पर शायद उनका सामना करने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा को मनाने की आखिरी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी।

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