समाजवादी पार्टी का दर्द बांटने के लिए बसपा-कांग्रेस ने संभाला मोर्चा

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नई दिल्ली :उत्तर प्रदेश की सियासत में नई इबारत लिखी जाने लगी है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सपा-बसपा गठबंधन की कवायद के बीच दोनों दलों के नेता एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं. अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई अखिलेश यादव पर शिकंजा कसने के मूड में दिखी तो दर्द सपा को ही नहीं बल्कि बसपा और कांग्रेस को भी होने लगा है. यही वजह है कि अखिलेश के बचाव में बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और कांग्रेस के महासचिव गुलाम नबी आजाद खुलकर खड़े हो गए हैं.कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘मोदी सरकार ने जो वादे किए उनको पूरा करने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। सिर्फ इस पर पूरा ध्यान लगाया है कि सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग का कैसे अपने विरोधियों को कमजोर करने और उन पर आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल करना है। चाहे कांग्रेस के नेता हों, राकांपा के नेता हों, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक या अन्नाद्रमुक के नेता हों, उन पर सीबीआई, आयकर और ईडी की कार्रवाई के जरिए उनको डराने धमकाने का पूरा प्रयास किया। राफेल का मुद्दा कांग्रेस अध्यक्ष लगातार उठाते आ रहे हैं। पूरा देश कह रहा है कि राफेल खरीद बहुत बड़ा घोटाला है।

वहीँ बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में खनन से जुड़े एक लंबित मामले में सीबीआई की जांच के दायरे में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी शामिल किए जाने को लेकर लगायी जा रही अटकलों को भाजपा का चुनावी हथकंडा बताते हुये सोमवार कहा कि सपा प्रमुख को इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मायावती की ओर से जारी बयान के अनुसार मायावती ने अखिलेश से टेलीफोन पर बात कर कहा ‘‘भाजपा द्वारा इस तरह की घिनौनी राजनीति और इनका चुनावी षडयंत्र कोई नयी बात नहीं है, बल्कि यह उनका पुराना हथकंडा है। इसे देश की जनता अच्छी तरह से समझती है।मायावती ने कहा कि जिस दिन एसपी-बीएसपी के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात संबंधी खबर मीडिया में आई, तभी से बीजेपी ने सीबीआई को लंबित पड़े खनन मामले में छापेमारी करवाई। इसके अलावा अखिलेश से पूछताछ करने संबंधी खबर जानबूझकर फैलाई गई। उन्होंने कहा कि यह चुनावी षडयंत्र के तहत एसपी-बीएसपी को बदनाम और प्रताड़ित करने की कार्रवाई नहीं तो और क्या है?

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