बुलंदशहर हिंसा:बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को बचाने कोशिश तेज़

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नई दिल्ली :बुलंदशहर में हुए बवाल के मामले में पुलिस टीमों ने देर रात तक दबिशों का दौर जारी रहा। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी बजरंग दल के जिला संयोजक समेत अन्य दंगाइयों की तलाश ताबड़तोड़ दबिशें दी जा रही हैं। दबिश के दौरान पुलिस पर कई घरों में तोड़फोड़ करने का आरोप है। उधर, मंगलवार को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन में सलामी दी गई। बलवे में मृत युवक के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। प्रशासन के आश्वासन के बाद देरशाम को अंतिम संस्कार किया गया.वहीँ दूसरी तरफ बुलंदशहर में गोहत्‍या के शक में की गई हिंसा और हत्‍या का मामला अभी सुलझा नहीं था कि गोकशी में बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज की ओर से दर्ज कराई गई FIR पर बवाल मच गया है। परिवार कहना है कि योगेश राज के दबाव में पुलिस ने दो नाबालिगों के नाम FIR में दर्ज कर लिए हैं। उधर, पुलिस अधिकारी अभी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बुलंदशहर में गोकशी के शक में हुई भीड़ की हिंसा पर समीक्षा बैठक की. सीएम योगी का समीक्षा बैठक में पूरा फोकस गोकशी पर रहा.

इस दौरान उन्होंने हिंसा में मारे यूपी पुलिस के इस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह पर एक शब्द भी नहीं बोला. सीएम ने इस घटना पर मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, अपर पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस के साथ बैठक की. बैठक के बाद एक प्रेस रिलीज जारी की गई, जिसमें इंस्पेक्टर का कहीं जिक्र नहीं था. न ही इसमें हिंसा और पुलिस सुरक्षा को लेकर किसी तरह की कोई बात कही गई है.सीएम योगी ने बैठक में घटना की समीक्षा कर निर्देश दिए, ‘इसकी गंभीरता से जांच की जाए और गोकशी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बड़ा साजिश का हिस्सा है, इसलिए गोकशी के मामले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोगों को समय पर गिरफ्तार किया जाए.इसके साथ ही उन्होंने हिंसा में मरने वाले युवक सुमित के परिवार वालों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की. यह भी निर्देश दिया गया कि अभियान चलाकर माहौल खराब करने वाले तत्वों को बेनकाब करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए.

बता दें की गोकशी मामले में दर्ज कराई गई एफआईआर में सात लोगों को नामजद किया गया है. एनडीटीवी ने इस एफआईआर की पड़ताल की. पड़ताल में सामने आया कि सात में से छह नाम बोगस हैं. हमने ये जानने की कोशिश की है कि जो गोकशी के लिए सात लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर लिखी गई है सभी नयाबांस गांव के हैं? ये बात तो साफ हो गई कि सात में से दो नाबालिग बच्चे हैं तो बाकि पांच नाम कौन हैं?एनडीटीवी की टीम जब गांव में जानने पहुंची तो पता चला कि शराफत (जिनका नाम एफआईआर में है) पिछले 10 साल से गांव में रहते ही नहीं. वह फरीदाबाद में रहते हैं और कई सालों से गांव भी नहीं आए. बाकी तीन नाम सुदैफ, इलियास और परवेज इस गांव के हैं ही नहीं. न तो इनका यहां घर और न ही जमीन. गांव वालों ने इनका नाम पहले नहीं सुना. आखिरी नाम बचा सर्फुद्दीन का वह पुलिस थाने गए हैं वो गांव के ही हैं. एक बात साफ हो गई है कि सात नाम में से छह नाम बोगस हैं. सवाल यहां यह उठता है कि क्या योगेश राज ने जानबूझकर इनका नाम एफआईआर में डलवाया था?

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