अदालत के फैसले से आलोक वर्मा खुश ,मुश्किल में फंस सकते हैं राकेश अस्थाना

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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे सीबीआइ रिश्वतखोरी के मामले की बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीबीआइ के निदेशक आलोक वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा को मंजूरी दे दी है कि वे विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के केस की फाइलों की जांच कर सकें। हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) के दफ्तर में जाकर केस से संबंधित फाइलों की जांच कर सकते हैं। अगली सुनवाई अब सात दिसंबर को होगी।बता दें कि कल यानि कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राकेश अस्थाना द्वारा आलोक वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट आलोक वर्मा द्वारा केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है.केंद्र सरकार ने बीते 23 अक्टूबर को केंद्रीय सतर्कता आयोग की सलाह पर आलोक वर्मा से सारे अधिकार वापस ले लिए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया था. वर्मा की जगह पर एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था.इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सुप्रीम कोर्ट जज एके पटनायक की निगरानी में आलोक वर्मा पर लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते में पूरी करे.सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मीट कारोबारी मोईन क़ुरैशी को क्लीनचिट देने में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज किया. अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मोईन क़ुरैशी मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी.जिसके बाद राकेश अस्थाना ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर ही इस मामले में आरोपी को बचाने के लिए दो करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगाया. दोनों अफसरों के बीच मची रार सार्वजनिक हो गई तो केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया. साथ ही अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच कर रहे 13 सीबीआई अफसरों का भी तबादला कर दिया गया था.

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