CBI विवाद में मोदी सरकार को ज़बरदस्त झटका,अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया

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नई दिल्ली: CBI Vs CBI मामले में सुप्रीम कोर्ट सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा. छह दिसंबर को सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने आलोक वर्मा और कॉमन कॉज की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था.पीठ ने पूछा कि जब जुलाई में ही पता चल गया था तो सरकार को चयन समिति के पास जाने में क्या दिक्कत थी? ये ऐसा मामला नहीं है कि रातोंरात ऐसे हालात बन गए. चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार के कार्य संस्थान के हित में होने चाहिए.सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने का निर्णय किया था. दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

केन्द्र ने इसके साथ ही ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेन्सी के निदेशक का अस्थाई कार्यभार सौंप दिया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने पिछले साल छह दिसंबर को आलोक वर्मा की याचिका पर आलोक वर्मा, केन्द्र, केन्द्रीय सतर्कता आयोग और अन्य की दलीलों पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि इस पर निर्णय बाद में सुनाया जाएगा.पीठ ने गैर सरकारी संगठन कामन काज की याचिका पर भी सुनवाई की थी. इस संगठन ने न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था.न्यायालय ने जांच ब्यूरो की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से केन्द्रीय सतर्कता आयोग को कैबिनेट सचिव से मिले पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच दो सप्ताह के भीतर पूरी करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपने का निर्देश दिया था. यही नहीं, न्यायालय ने सीवीसी जांच की निगरानी की जिम्मेदारी शीर्ष अदालत के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश ए के पटनायक को सौंपी थी.

अब इस पुरे मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सूना दिया है और जस्टिस कौल ने कहा की सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को जिस प्रक्रिया के तहत हटाया गया है वह पूरी तरह से असंवैधानिक है ,विनीत नारायण केस का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा की डायरेक्टर को हटाने से पहले कमिटी में भेजी जाती है। इस तरह से कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला रद कर दिया है और इस तरह मोदी सरकार को ज़बरदस्त झटका लगा है चूँकि अदालत ने सीवीसी के फैसले को रद करते हुए डायरेक्टर अलोक वर्मा को सीवीसी द्वारा छुट्टी पर भेजना असंवैधानिक है और अदालत इस फैसले को खारिज करती है। और इस तरह आलोक वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बने रहेंगे।

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