क्या सच में कोवैक्सिन में बछड़ा का खून मिला है ?

0
106

कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए देश में 21 जून से मुफ्त टीकाकरण शुरू करने की तैयारी जारी हैं। इस बीच, भारत बायोटेक कंपनी की कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन को बनाने में गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों की ओर से तीखे सवाल उठाए जाने पर भारत बायोटेक ने अपनी सफाई में कहा कि कोशिकाएं (सेल) विकसित करने में गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन कोवाक्सिन वैक्सीन के अंतिम फॉर्मूले में इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। गौरव पांधी ने बताया कि कोवैक्सीन में बछड़े के सीरम का इस्तेमाल हुआ है। ये जवाब सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने विकास पाटनी नाम के व्यक्ति के आरटीआई पर दिया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि हम चाहते हैं कि सरकार और भारत बायोटेक आरटीआई में जो जवाब आया है, उसका जवाब दें।


इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के रिसर्च पेपर में भी ये बात बताई गई थी कि कोवैक्सिन बनाने के लिए नवजात पशु के ब्लड का सीरम उपयोग किया जाता है। इसे पहली बार किसी वैक्सीन में उपयोग नहीं किया जा रहा है। यह सभी बायोलॉजिकल रिसर्च का जरूरी हिस्सा होता है।

रिसर्च में दावा किया गया था कि कोवैक्सिन के लिए नवजात बछड़े के 5% से 10% सीरम के साथ डलबेको के मॉडिफाइड ईगल मीडियम (DMEM) को इस्तेमाल किया जाता है। DMEM में कई जरूरी पोषक होते हैं, जो सेल को बांटने के लिए जरूरी होते हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस के आरोपों को प्रोपेगेंडा करार दिया है। हिंदुस्तान और विश्व कोविड से लड़ रहा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी वैक्सीन ड्राइव में भ्रम फैला रही है। कांग्रेस ने महापाप किया है और कोवैक्सिन को लेकर भ्रम फैलाया है। कोवैक्सिन में गाय के बछड़े का खून होने की बात कांग्रेस कर रही है। सोशल मीडिया में है कि इसके लिए गाय का कत्ल किया जा रहा है। इसको लेकर हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि कोवैक्सिन में गाय के बछड़े का सीरम या खून नहीं है।

कांग्रेस नेता के आरोप के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि सोशल मीडिया पर कोवैक्सिन के बारे में गलत जानकारी शेयर की जा रही है। पोस्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। नवजात बछड़े के सीरम का उपयोग सिर्फ वेरो सेल्स को तैयार करने में किया जाता है, जो बाद में अपने आप ही नष्ट हो जाते हैं। जब अंतिम समय में वैक्सीन का प्रोडक्शन होता है, तब इसका उपयोग नहीं किया जाता है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here