योगी राज में स्कूल के अंदर गाय आराम कर रही है और बाहर खुले में पढ़ रहे हैं छात्र

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लखनऊ : यह अपने आप में इस देश का दुर्भाग्यपूर्ण है की आज कल शिक्षा से अधिक महत्व गाय का हो गया है ,हद तो यह है की मानव की जान से अधिक क़ीमती यह गाय आज की तारीख में हो चुकी है। अब खबर यह आ रही है उत्तरप्रदेश के कई शहरों में विधालय के अंदर गाय को बांध दिया गया है और छात्रों को स्कूल से बाहर बैठा कर पढ़ाया जा रहा है।एक खबर यह है की यूपी के अमरोहा में आवारा पशुओं से तंग आकर गांव वालों ने प्राथमिक स्कूल में गायों को बंद कर दिया. वहीं स्कूल में गायों को भरने के बाद प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को बाहर बैठा दिया गया जिसके बाद गांव के प्राथमिक विद्यालय की पढ़ाई चौपट हो गई. जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने पुलिस की मदद से स्कूल से गायों को बाहर निकालकर विद्यालय के पहले की तरह शुरू कराया और इस पूरे मामले में एसडीएम का कहना है कि बहुत जल्द इनकी समस्या का समाधान कराने के लिए अस्थाई गौशाला का निर्माण कराया जाएगा.


दूसरी ख़बर प्रयागराज से है। प्रयागराज में किसानों ने आवारा पशुओं को स्कूल में बंद कर दिया जिसकी वजह से कड़ाके की ठंड में स्कूल के बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ना पड़ा.यहां के शंकरगढ़ इलाके में भदवार गांव में सोमवार की सुबह जब छोटे बच्चे अपने प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने आए तो उस स्कूल में गाय-बैलों को देखकर दंग रह गए. स्कूल के प्रिंसिपल कमलेश सिंह के मुताबिक रविवार की रात इलाके में हो रही बारिश और ओलों के चलते जो आवारा पशु खेतों में फसल खाने आते हैं वह गांव में घुस आए. गांव वालों ने उन पशुओं को लाकर स्कूल में बंद कर दिया. आधी रात से लेकर सोमवार की दोपहर तक ये जानवर स्कूल में ही बंद रहे और ठंड में बच्चों को स्कूल के बाहर त्रिपाल बिछाकर पढ़ाई करनी पड़ी.बरवार गांव के सरपंच त्याग राज सिंह ने आजतक से बातचीत में बताया कि उन्होंने गांव वालों को ऐसा ना करने की हिदायत दी थी, लेकिन आवारा पशुओं द्वारा फसल चर जाने से नाराज गांव वालों ने किसी की बात नहीं सुनी.

पशुओं ने स्कूल के अंदर लगाई गई फुलवारी को भी नष्ट कर दिया.सोमवार को ही इलाके के प्रशासनिक अधिकारियों के आने के बाद पशुओं को स्कूल से बाहर निकाला गया. इसके बाद स्कूल की साफ सफाई की गई, लेकिन स्कूल में आज भी बदबू है और इसी बदबू के बीच बच्चों को बैठकर पढ़ना पड़ रहा है.शंकरगढ़ इलाके के कई किसान ऐसे हैं, जिन्होंने पशुओं के आतंक से इस बार गेहूं की बुवाई ही नहीं की. इसी गांव के रहने वाले विकास सिंह ने बताया कि उनकी धान की फसल बर्बाद हो गई जिसके बाद उन्होंने पशुओं के खौफ में फसल ही नहीं लगाई.

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