सरकारी मज़ाक़।लॉकडाउन में कितने मज़दूर मर गए ? सरकार का जवाब -नहीं मालूम

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नई दिल्ली. संसद का मानसून सत्र (monsoon session) आज से शुरू हो गया. कोरोना काल के चलते सदन में लिखकर सवाल जवाब किए जा रहे है. लोकसभा (Lok Sabha) में विपक्ष के कई सांसदों ने सरकार से पूछा कि, लॉकडाउन (Lockdown) के चलते देश में कितने प्रवासी मजदूरों (migrant workers) की जान गई. जिस पर सरकार की ओर से कहा गया कि, उसके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जो बता सके कि इस दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई.
केंद्र सरकार ने संसद में सोमवार को कहा कि 68 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान जान गंवाने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या पर कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. दरअसल, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय से लोकसभा में जानकारी मांगी गई थी कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कितने प्रवासी श्रमिकों ने अपने मूल निवास लौटने की कोशिश में जान गंवाई और क्या राज्यवार आंकड़ा मौजूद है.

केंद्र सरकार की ओर से मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लिखित जवाब दिया, जिसमें कहा गया है कि भारत ने एक देश के रूप में केंद्र-राज्य सरकार, लोकल बॉडी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. मौत के आंकड़ों को लेकर सरकार का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई डाटा नहीं है. वहीं, राशन के मसले पर मंत्रालय की ओर से राज्यवार आंकड़ा उपलब्ध ना होने की बात कही है. लेकिन 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अतिरिक्त चावल या गेहूं, एक किलो दाल नवंबर 2020 तक देने की बात कही गई है. इससे अलग सरकार की ओर से लॉकडाउन के वक्त गरीब कल्याण योजना, आत्मनिर्भर भारत पैकेज, EPF स्कीम जैसे लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई है.

वहीं, राशन के मसले पर मंत्रालय की ओर से राज्यवार आंकड़ा उपलब्ध ना होने की बात कही है. लेकिन 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अतिरिक्त चावल या गेहूं, एक किलो दाल नवंबर 2020 तक देने की बात कही गई है. इससे अलग सरकार की ओर से लॉकडाउन के वक्त गरीब कल्याण योजना, आत्मनिर्भर भारत पैकेज, ईपीएफ स्कीम जैसे लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई है.

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