खून के बदले खून न्याय कभी नहीं होता:पूर्व CJI आरएम लोढ़ा

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे आरएम लोढा ने लोकसभा से पारित नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर बनाया गया कोई भी कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने मानवाधिकार दिवस पर हैदराबाद एनकाउंटर की घटना पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि, आज हम एक ओर मानवाधिकार दिवस मना रहे हैं और दूसरी ओर हम बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष भी कर रहे हैं। हर जगह अराजकता का माहौल है। तेलंगाना की घटना इसका उदाहरण है। वे आज मानवाधिकार दिवस पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि खून के बदले खून न्याय कभी नहीं होता है। ऐसा लगता है कि हम सभी हम्मूराबी सभ्यता की ओर वापस लौट रहे है जहां हिंसा के बदले हिंसा को ही न्याय कहा जाता था। उन्होंने कहा कि हैदराबाद इनकांउटर की जांच होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि पिछले 30 साल से पुलिस रिफोर्म का मुद्दा अटका हुआ है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आज पूरे बजट का न्यायपालिका पर महज 0.08 फीसदी खर्च ही करता है।

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