फैज की कविता ‘हम देखेंगे लाजिम है’ पर हिन्दू विरोधी का इलज़ाम,IIT कानपुर की समिति करेगी जांच

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नई दिल्ली:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (IIT Kanpur) ने एक समिति गठित की है, जो यह तय करेगी कि क्या फैज अहमद फैज की कविता ‘हम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ हिंदू विरोधी है। फैकल्टी सदस्यों की शिकायत पर यह समिति गठित की गई है। फैकल्टी के सदस्यों ने कहा था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह ‘हिंदू विरोधी गीत’ गाया था।
समिति इसकी भी जांच करेगा कि क्या छात्रों ने शहर में जुलूस के दिन निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया? क्या उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की और क्या फैज की कविता हिंदू विरोधी है? कविता इस प्रकार है, ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे, जब अर्ज-ए-खुदा के काबे से. सब बुत उठाए जाएंगे, हम अहल-ए-वफा मरदूद-ए-हरम, मसनद पे बिठाए जाएंगे. सब ताज उछाले जाएंगे, सब तख्त गिराए जाएंगे. बस नाम रहेगा अल्लाह का. हम देखेंगे.’ बताया जा रहा है कि इसकी अंतिम पंक्ति ने विवाद खड़ा कर दिया है.
बता दें कि जामिया कैंपस में पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों से एकजुटता जाहिर करने के लिए आईआईटी कानपुर के छात्रों ने कैंपस में जुलूस निकाला था जिसमें फैज अहमद फैज की यह कविता गाई थी।इसके बाद आईआईटी के एक शिक्षक और कुछ स्टूडेंट्स ने इस पर आपत्ति जताते हुए डायरेक्टर से शिकायत की। इसके बाद डायरेक्टर की ओर से शिक्षकों की जांच कमिटी बनाई गई थी। बताया जा रहा है कि तीन विषयों पर जांच चल रही है, पहला दफा 144 तोड़कर जुलूस निकालना, दूसरा सोशल मीडिया पर छात्रों की पोस्ट और तीसरा फैज अहमद फैज की नज्म हिंदू विरोधी है या नहीं?

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