कश्मीर पर पाबंदियों के खिलाफ IAS कन्नन ने दिया इस्तीफा

0
40

नई दिल्ली :केरल कैडर के IAS और पिछले दिनों बाढ़ राहत कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहे IAS कन्नन गोपीनाथन ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कश्मीर में चल रहे ब्लैकआउट और ‘मौलिक अधिकारों के हनन’ को इस्तीफे की वजह बताया है.कन्नन ने केरल राज्य में कई अहम पदों पर काम किया है. वो ऊर्जा और अपरंपरागत ऊर्जा स्त्रोत विभाग के सचिव रहे हैं. कन्नन ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पद पर भी काम किया है.गोपीनाथ ने कहा, ‘मेरे इस्तीफे से कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा लेकिन हर किसी को अंतर्रात्मा को आवाज देना होता है’. आपको बता दें कि गोपीनाथ दादर नगर हवेली में कई मुख्य विभागों में सचिव हैं और उन्होंने घाटा झेल रही एक सरकारी बिजली कंपनी के फायदे में ला दिया था.

उन्होंने कहा कि 20 दिनों से जम्मू-कश्मीर में लोगों के ‘मूलभूत अधिकार’ छीन लिए गए हैं और ऐसा लगता है कि बाकी भारत इसमें पूरी तरह से सहमत है. यह 2019 में भारत में हो रहा है. अनुच्छेद 370 को हटाना कोई मुद्दा नहीं है. लेकिन नागरिकों के अधिकार छीन लेना मुख्य मुद्दा है. वह इसका विरोध करते हैं या स्वागत करता हैं वहां के लोगों पर निर्भर करता है. गोपीनाथ ने कहा कि इस मुद्दे ने उन्हे आहत किया है और यह उनके इस्तीफे के लिए काफी है. 7 साल तक भारतीय प्रशासन सेवा में काम करने के बाद उन्होंने 21 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है.

उन्होंने कहा कि वह सिविल सेवा में इस उम्मीद से शामिल हुए थे कि वह उन लोगों की आवाज बन सकेंगे जिन्हें खामोश कर दिया गया लेकिन यहां, वह खुद की आवाज गंवा बैठे। उन्होंने कहा कि वह अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वापस चाहते हैं। वह अपनी तरह से जीना चाहते हैं, भले ही वह एक दिन के लिए ही हो।कन्नन इन दिनों पावर एंड नॉन कन्वेंशनल ऑफ एनर्जी में सचिव पद पर कार्यरत थे।

कहा जा रहा है कि कश्मीर कैडर के आईएएस अधिकारी शाह फैसल के बाद सबसे कम उम्र में आईएएस से इस्तीफा देने वाले वह दूसरे आईएएस अधिकारी हैं। चर्चा है कि वह मौजूदा प्रशासनिक कार्यशैली से नाखुश थे। हलांकि उन्होंने अपने त्यागपत्र में इसे लेकर कुछ लिखा नहीं है। 2012 सिविल सेवा परीक्षा में कन्नन ने 59वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here