उर्दू साहित्य को बढ़ावा देने में जश्न-ए-विरासत-ए-उर्दू की अहम भूमिका,जश्न का पांचवा दिन सम्पन्न

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नई दिल्ली :उर्दू अकादमी और दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित जश्न-ए-विरासत-ए-उर्दू का पाँचवां दिन भी लोगों के लिए बेहद उत्साहजनक था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जोश ड्रामा क्लब के कलाकारों ने ‘पहले आप’ नामक उर्दू नाटक का बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस नाटक का निर्देशन दूरदर्शन में काम कर चुके और पन्द्रह साल के अनुभवी निर्देशक डॉ. अदनान बिस्मिल्लाह ने किया। अदनान का कहना था कि कला की तेज संसाधनों से नहीं प्रतिभा से दिखती है। सभी कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन किया। आज के परिदृश्य को दिखाता हुआ नाटक ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।हर दिन की भांति क़िस्सा से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। टैलेन्ट ग्रुप ने बाल दिवस को केन्द्र में रखकर क़िस्सा ‘बचपन के खेलों’ का प्रदर्शन किया। टैलेन्ट ग्रुप के बच्चों ने शानदार अभिनय का नमूना दिखाया।शाहिद सामी नियाज़ी और उनकी टीम ने महफिल-ए-क़व्वाली का शानदार आगाज़ किया। ‘क्या से क्या हो गए देखते-देखते’ गाते ही दर्शकगण मस्ती में झूम उठे।

शाम-ए-ग़ज़ल में अपने सुरों की जादू बिखेरते ज़ुल्फी ख़ान साबरी नज़र आए। उन्होंने अपने सुरों की जादू से भीड़ को ग़ज़लों के मध्य गुम कर दिया। श्रोतागण मन्त्रमुग्ध थे।कोच्ची से आई सितारा और उनकी टीम ने भी शाम-ए-ग़ज़ल की महफिल में चार चाँद लगा दिया। अपने गायिकी से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाली यह टीम ने दर्शकों से ख़ूब तालियां बटोरी।महोत्सव का पाँचवां दिन ग़ज़लों की शाम के नाम ही रहा। राधिका चोपड़ा ने भी शाम-ए-ग़ज़ल की शान को बरकरार रखते हुए दर्शकों को सुर से बांधे रखा।

एक से बढ़कर एक ग़ज़ल से श्रोता मनोरंजित होते रहे।अमरोहा से आए असलम वारसी ने महफिल-ए-क़व्वाली से लोगों को ग़ज़ल से सूफी कलाम की ओर ले गए। क़व्वलियों के साथ-साथ ही दर्शकों की तालियाँ चलने लगी।उर्दू के रंग में रंगा सेंट्रल पार्क का विहंगम दृश्य विदेशी मेहमानों को भी खींच लाई।

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