JNU छात्रों के आंदोलन में अमित शाह की हुई एंट्री,एक्शन में नज़र आए गृह मंत्री

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नई दिल्ली :दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के खिलाफ छात्रों की जंग अभी भी जारी है. सड़क पर प्रदर्शन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में JNU प्रशासन पर बरसने के बाद छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. JNU के नेत्रहीन छात्र कल दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं. मंत्रालय की कमेटी से मिलने के बाद भी JNU छात्र संघ संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि प्रदर्शन जारी रहेगा.वहीँ अब जेएनयू छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में अब दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का छात्र संघ भी आ गया है. आज जेएनयू और डीयू के छात्र मार्च निकालेंगे. यह जानकारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने ट्वीट करके दी.दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, ‘DUSU ने JNU को समर्थन करने का फैसला किया है और बुधवार को एचआरडी मंत्रालय तक मार्च निकाला जाएगा. यह लड़ाई उच्च शिक्षा के लिए है. सस्ती शिक्षा अधिकार है और ये विशेषाधिकार नहीं है. JNU और DU के छात्र एचआरडी मंत्रालय तक एक साथ मार्च निकालेंगे. यह मार्च मंडी हाउस से निकाला जाएगा.

इधर जेएनयू मामले में अब गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री हो चुकी है। हॉस्टल फीस व अन्य शुल्क में बढ़ोतरी पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों के आंदोलन और दिल्ली पुलिस से टकराव पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नाराजगी जताई है। शाह ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाकात कर पूरी स्थिति पर जवाब मांगा है। शाह ने निशंक से कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर दखल देकर हालात को जल्द से जल्द सामान्य करें। शाह की शिकायत है कि मानव संसाधन मंत्रालय ने जेएनयू के हालात से निपटने में चूक की है।
वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक शाह ने दो टूक कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्रों के इस तरह के आंदोलन ठीक नहीं है। इससे पहले भी कई मसलों पर जेएनयू समेत कई विश्वविद्यालयों में छात्र आंदोलन पर उतर आए थे। शाह और निशंक की यह मुलाकात अहम माना जा रहा है क्योंकि जेएनयू छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर निरंकुश होने का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर गृहमंत्रालय के तहत काम करती है।

सूत्रों के मुताबिक शाह ने यह भी कहा कि बढ़ी हॉस्टल फीस और अन्य शुल्क का फैसला वापस लिया जा सकता है। निशंक ने शाह को बताया फीस बढ़ोतरी आंशिक रूप से वापस करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है। छात्र नेताओं और संगठनों से बातचीत के लिए तीन सदस्यों की कमेटी भी गठित की गई है। निशंक ने भरोसा दिलाया कि स्थिति सामान्य कर ली जाएगी।

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