दिल्ली में लॉकडाउन का मतलब,क्या होगा और क्या नहीं ,जानिए

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नई दिल्ली :कल से 31 मार्च तक दिल्ली में लॉकडाउन. पब्लिक ट्रांसपोर्ट रहेंगे बंद. डीटीसी की 25 फीसदी बसें चलेगी. दिल्ली की दुकानें, बाजार सब बंद रहेंगे. दिल्ली के बॉर्डर सील रहेंगे लेकिन दूसरे राज्यों से खाने-पीने के सामान और सब्जी लाने वाले वाहनों को अनुमति होगी. सभी फ्लाइट्स बंद, धार्मिक स्थल बंद.

हिंदुस्तान में इस घातक वायरस को फैलने से रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है. पीएम मोदी ने रविवार यानी 22 मार्च को सुबह 7 बजे से 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है. इस दौरान मेट्रो और ट्रेनों को भी बंद करने का फैसला लिया गया है. इसके बाद सोमवार से फिर मेट्रो और ट्रेनें चलेंगी. सोमवार को मेट्रो को अलग तरीके से चलाया जाएगा, ताकि कोरोना वायरस को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखा जा सके.डीएमआरसी के मुताबिक सोमवार को सभी लाइनों में मेट्रो सुबह 6 बजे से 8 बजे तक 20 मिनट के अंतराल से चलेगी. इस दौरान सिर्फ हॉस्पिटल, फायर ब्रिगेड, इलेक्ट्रिसिटी और पुलिस जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को ही मेट्रो में यात्रा करने दी जाएगी. इन लोगों को आईडी कार्ड दिखाने पर ही मेट्रो स्टेशन में एंट्री मिलेगी.

 

क्या होता है लॉकडाउन?

लॉकडाउन एक इमर्जेंसी व्यवस्था होती है। अगर किसी क्षेत्र में लॉकडाउन हो जाता है तो उस क्षेत्र के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है। जीवन के लिए आवश्यक चीजों के लिए ही बाहर निकलने की अनुमति होती है। अगर किसी को दवा या अनाज की जरूरत है तो बाहर जा सकता है या फिर अस्पताल और बैंक के काम के लिए अनुमति मिल सकती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल के काम से भी बाहर निकलने की अनुमति मिल सती है।

क्यों करते हैं लॉकडाउन?

किसी तरह के खतरे से इंसान और किसी इलाके को बचाने के लिए लॉकडाउन किया जाता है। जैसे कोरोना के संक्रमण को लेकर कई देशों में किया गया है। कोरोनावायरस का संक्रमण एक-दूसरे इंसान में न हो इसके लिए जरूरी है कि लोग घरों से बाहर कम निकले। बाहर निकलने की स्थिति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए कुछ देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति हो गई है।

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