जम्मू-कश्मीर से 35ए हटाने की.महबूबा मुफ़्ती का बड़ा बयान

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नई दिल्ली :पीडीपी नेता व जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 35ए को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा 35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। वह बोलीं जो हाथ 35ए के साथ छेड़छाड़ करने के लिए उठेगा वो हाथ ही नहीं वो सारा जिस्म जल के राख हो जाएगा। इससे पहले घाटी में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती को लेकर महबूबा मुफ्ती बयानबाजी कर चुकी हैं। इस संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र ने घाटी में खौफ पैदा करने के लिए यह फैसला लिया है।महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम अपनी आखिरी सांस तक कश्मीर की रक्षा करेंगे. पीडीपी कभी समाप्त नहीं होगी. आज बारिश में हमारे कार्यकर्ता अपना पैसा खर्च करके दूर दराज से आए हैं. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर के लिए शहीद हुए लोगों को याद करने की जरूरत है. हमें एक बड़ी लड़ाई के लिए तैयार रहने की जरूरत है. चुनाव आते हैं और चले जाते हैं लेकिन असली लड़ाई जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए लड़ना है. हम राज्य की स्थिति को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे.

महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘हमने उनसे (केंद्र सरकार) कहा कि दिनेश्वर शर्मा को मध्यस्थ बनाया जाए. हमने रमजान में संघर्ष विराम सुनिश्चित कराया. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. हमें अच्छे रिजल्ट की उम्मीद थी लेकिन दूसरे पक्ष से ऐसा कुछ नहीं हुआ. ट्रंप कहते हैं कि कश्मीर समस्या का समाधान निकलेगा, इसलिए इमरान खान और नरेंद्र मोदी भी कह रहे हैं. मुफ्ती सईद भी अमन चैन और वार्ता चाहते थे.’

महबूबा ने यह बयान श्रीनगर में एक रैली के दौरान दिया। जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ने कश्मीर घाटी में करीब 10 हजार अतिरिक्त जवानों को भेजने का आदेश दिया है। सरकार के इस फैसले से राज्य में हलचल काफी तेज हो गई है। महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने केंद्र सरकार के इस फैसला पर नाराजगी जाहिर की है।

केंद्र सरकार में उच्च पदस्थ सूत्र ने दावा किया कि राज्य में विवादित अनुच्छेद 35ए हटाने की उल्टी गिनती शुरू हाे चुकी है। इसे हटाने के बाद के हालात से निपटने के लिए अतिरिक्त जवान भेजे जा रहे हैं। सूत्राें ने कहा कि अनुच्छेद-35ए हटाने के विरोध की अाड़ में राष्ट्र विरोधी तत्व हिंसा फैला सकते हैं। ऐसे लाेगाें की सूची भी तैयार है। इन्हें एहतियात के ताैर पर हिरासत में रखा जाएगा। इस सूची में अलगाववादियाें के साथ ही कुछ स्थानीय राजनेता भी शामिल हैं। अनुच्छेद हटाने के बाद बनने वाले हालात से निपटने के ऑपरेशन को नाम भी दिया जा चुका है।

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