26/11:- मुंबई का काला दिन आज,11 साल हुए पुरे

0
13

मुंबई :26/11 (2008) के मुख्य साजिशकर्ता अजमल कसाब को 21 मई, 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटकाया गया था, लेकिन उसे अपनी गिरफ्तारी के चार-पांच दिन बाद ऐसा लगा था कि अब मौत उससे चंद सेकंड दूर है। इसीलिए उसने एक दिन इंस्पेक्टर दिनेश कदम से एकाएक हाथ जोड़ा और कहा कि ‘अब मुझे जाने की इजाजत दीजिए।’ कदम पहले तो समझ ही नहीं पाए कि कसाब ऐसा क्यों कह रहा है, क्योंकि जो आतंकवादी मुंबई पुलिस की कस्टडी में है, वह जाने की इजाजत कैसे मांग सकता है। बाद में जब उन्होंने कसाब से पूछा कि तुम यह क्या बक रहे हो? तो उसने जवाब दिया कि वह ‘ऊपर’ जाने की इजाजत मांग रहा है।
26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। इस आतंकी हमले को आज 11 साल हो गए हैं लेकिन यह भारत के इतिहास का वो काला दिन है जिसे कोई भूल नहीं सकता। हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई हमले को याद करके आज भी लोगों को दिल दहल उठता है।

1. कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे: मुंबई हमलों की छानबीन से जो कुछ सामने आया है, वह बताता है कि 10 हमलावर कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे थे। इस नाव पर चार भारतीय सवार थे, जिन्हें किनारे तक पहुंचते-पहुंचते ख़त्म कर दिया गया। रात के तकरीबन आठ बजे थे, जब ये हमलावर कोलाबा के पास कफ़ परेड के मछली बाजार पर उतरे। वहां से वे चार ग्रुपों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंजिलों का रूख किया।

2. मछुवारों को था शक : कहते हैं कि इन लोगों की आपाधापी को देखकर कुछ मछुवारों को शक भी हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी। लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here