आज मुझे अपने मुस्लमान होने का एहसास दिलाया गया:BHU प्रोफेसर फ़िरोज़ खान

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में संस्कृत प्रोफेसर के तौर पर फिरोज खान की नियुक्ति कुछ लोगों को भा नहीं रही है. कई छात्रों ने इस पर विवाद किया और इस नियुक्ति का विरोध किया. पिछले 13 दिनों से इस मसले पर छात्र कुलपति आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्हें उनके धर्म और संस्कृति की शिक्षा सिर्फ़ कोई आर्य ही दे सकता है. लिहाज़ा उनकी नज़र में अनार्य टीचर फ़िरोज़ ख़ान के ख़िलाफ़ वो 12 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. धर्म के नाम पर किसी योग्य टीचर का विरोध करने वालों को कैंपस में आंदोलन करने की छूट मिली हुई है.
ऐसे में एक ताजा मामला और आ गया कि बीएचयू के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में वीर सावरकर की मूर्ति की फोटो के साथ छेड़छाड़ की गई है. छात्रों ने न सिर्फ़ स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के फोटो को दीवार से उखाड़ कर नीचे फेंक दिया, बल्कि उस पर स्याही भी पोत दी. बीएचयू के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में महात्मा गांधी, बाबा साहब आंबेडकर और वीर सावरकर सहित कई महापुरुषों के चित्र लगे हुए हैं. सभी क्लासरूम में तीन वर्ष पहले छात्रों और शिक्षकों के सहयोग से इन चित्रों को लगाया गया था.
इधर संस्कृत प्रोफेसर फ़िरोज़ खान ने कहा है की उन्होंने ने पूरी ज़िन्दगी संस्कृत को अपने शौक़ ,जज्बे और जूनून के साथ पढ़ी है। संस्कृत से मुझे प्रेम है इस लिए मैंने इस भाषा का चयन किया और इसको पढ़ने सिखने में सारा समय लगा दिया ,लेकिन संस्कृत के इस सफर में हमें किसी भी मोड़ पर ऐसा एहसास नहीं हुवा की यह भाषा हमारे लिए नहीं है,हम इसमें अपना भविष्य नहीं बना सकते,चूँकि इस भाषा में धर्म की दिवार है जो आपको आगे नहीं जाने देगी चूँकि मेरे धर्म कुछ और है। फ़िरोज़ खान ने कहा की पूरी ज़िंदगी में संस्कृत पढ़ते वक़्त कभी भी इस बात का एहसास नहीं हुवा की वह मुस्लमान हो कर संस्कृत क्यों पढ़ रहे हैं ,लेकिन आज बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में हमारी नियुक्ति के बाद जो कुछ हो रहा है ,इन घटनाओं में आज इस बात का एहसास दिलाया है की में मुसलमान हूँ और मेरा संस्कृत भाषा से कोई सरोकार नहीं होना चाहिए।

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