राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा,PMO का नया बहाना!

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नई दिल्ली :केंद्र सरकार ने राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है. इसमें सरकार अपने पुराने रुख और दलीलों पर कायम है. केंद्र सरकार ने कहा है कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक खुलासे से देश की संप्रभुता और आस्तित्व पर खतरा है. सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे के गोपनीय दस्तावजों से परीक्षण से रक्षाबलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है.

सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे (Rafale Deal) के गोपनीय दस्तावजों रे परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है. हलफनामे में सरकार ने कहा कि राफेल (Rafale Deal) पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती- फिरती जांच की कोशिश की गई. मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला. ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं. इस हलफनामे में केंद्र ने कहा कि इस सरकारी प्रक्रिया में पीएमओ द्वारा प्रगति की निगरानी को हस्तक्षेप या समानांतर वार्ता के रूप में नहीं माना जा सकता है। अपने हलफनामे में केंद्र ने यह भी कहा कि तत्कालीन माननीय रक्षा मंत्री ने कहा कि, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमओ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति का कार्यालय उन मुद्दों की प्रगति की निगरानी कर रहा है जो शिखर बैठक का एक परिणाम था।’

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल निर्णय की समीक्षा के लिए दायर याचिकाओं पर केंद्र से चार मई तक जवाब दाखिल करने को कहा था। इस मामले की सुनवाई कोर्ट छह मई को करेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र के वकील को मामले के पक्षकारों को यह पत्र भेजने की इजाजत दी। इन पक्षकारों में वे याचिकाकर्ता भी शामिल हैं जिन्हों पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की।

बता दें कि इससे पहले 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट राफेल सौदे से संबंधित कुछ नए दस्तावेजों को आधार बनाये जाने पर केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति को ठुकरा दिया था। इन दस्तावेजों पर केंद्र सरकार ने विशेषाधिकार का दावा किया था। केंद्र ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने विशेष दस्तावेज गैरकानूनी तरीके से हासिल किए और 14 दिसम्बर, 2018 के निर्णय को चुनौती देने के लिए इसका प्रयोग किया गया।

इस फैसले में न्यायालय ने फ्रांस से 36 राफेल विमान सौदे को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की एक पीठ ने कहा, ‘हम केन्द्र द्वारा समीक्षा याचिका की स्वीकार्यता पर उठाई प्रारंभिक आपत्ति को खारिज करते हैं।
पीठ ने केंद्र को पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं सहित सभी पक्षकारों में इसे वितरित करने की अनुमति प्रदान कर दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण के अलावा एक अन्य अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने राफेल सौदे के बारे में शीर्ष अदालत के 14 दिसंबर, 2018 के फैसले पर पुनर्विचार याचिकायें दायर की हुई हैं।

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