हिंदू राष्ट्रवाद भारत के लिए ख़तरनाक: राजदीप सरदेसाई

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पत्रकार राजदीप सरदेसाई की किताब ”2019: मोदी ने कैसे भारत जीता” का अनावरण

फ़ैसल फ़ारूक़
मुंबई: पिछले दिनों एनसीपीए और हार्पर कॉलिंस की साझा कोशिशों से लिटरेचर लाइव द्वारा यहां एक्सपेरिमेंटल थिएटर में आयोजित समारोह में प्रसिद्ध पत्रकार राजदीप सरदेसाई की नई किताब ”2019: मोदी ने कैसे भारत जीता” का अनावरण राजदीप की मां नंदिनी सरदेसाई और प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और पूर्व राज्यसभा सदस्य कुमार केतकर के हाथों हुआ। समारोह की मेज़बानी लिटरेचर लाइव ने की, जबकि संचालन का कार्यभार कुमार केतकर ने संभाला। प्रसिद्ध ब्रॉडकास्टर (एनाउंसर) अमीन सयानी और मशहूर फ़िल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।

इस अवसर पर कुमार केतकर से बातचीत करते हुए पद्मश्री सम्मानित पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा, ”जब आप राजनीति को धार्मिकता के साथ जोड़ते हैं, तो आपको एक मज़बूत शक्ति मिल जाती है और यह हिंदू राष्ट्रवाद है जो कि देश के लिए ख़तरनाक है। राजनीति के गलियारों में नैतिक मूल्यों का अभाव है।” नफ़रत की राजनीति और उसकी प्रोपेगंडा मशीन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप ने कहा, ”मीडिया का कर्तव्य है कि वह समाज को आईना दिखाए लेकिन दुर्भाग्य से आज मीडिया की प्रकृति ऐसी है कि यह अंतःस्थापित है। मीडिया सरकार की प्रोपेगंडा मशीन का एक हिस्सा है। आज भारतीय पत्रकारिता सच्चाई और ईमानदारी की राह से हट चुकी है।”

एक सवाल के जवाब में 2019 के चुनाव में मोदी की सरकार में वापसी पर राजदीप ने कहा, ”किसी राजनीतिक स्टैंड से हटकर एक बात जो विवाद से परे थी वह यह कि दूसरी बार मिली जीत मोदी एण्ड कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक जीत थी।” 2019 के चुनावों में विपक्ष और राहुल गांधी की भूमिका पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, ”राहुल गांधी ने कभी भी अवसर से वंचित होने का मौक़ा नहीं छोड़ा।” बातचीत के दौरान राजदीप ने कहा, ”मोदी का बेजा विरोध करना विपक्ष की समस्या का हिस्सा है। मोदी इसका इस्तेमाल कर स्वयं को मज़लूम या पीड़ित साबित करने की कोशिश में विक्टिम कार्ड खेलते हैं और विपक्ष को नुक़सान होता है और यही अमेरिका में ट्रम्प कर रहे हैं। चूंकि मोदी ट्रम्प से एक क़दम आगे हैं इसलिए उन्होंने यह काम व्यवस्थित ढंग से किया है।”

ग़ौरतलब है कि इस किताब में राजदीप सरदेसाई ने मोदी और अमित शाह के व्यक्तित्व का भी विश्लेषण किया है। मोदी और अमित शाह की दोस्ती का उल्लेख किया है। साथ ही, समाज में गहरे मतभेद पर क़ाबू पाने के लिए रास्ता भी बताया है। इस किताब में ”न्यू इंडिया” को दरपेश चुनौतियां के बारे में भी विस्तृत चर्चा की गई है और इन दिनों सबसे ज़्यादा चर्चित मुद्दा जो भारतीय मीडिया से संबंधित है, यानी उसकी प्रतिष्ठा पर संकट, इसका उल्लेख भी किताब में है। क़िस्सा संक्षेप कि राजनीति से रुचि रखने वालों के लिए यह एक ऐसी किताब है जिसमें बताया गया है कि नरेंद्र मोदी ने कैसे देश की जनता को प्रभावित किया और ज़बरदस्त जीत हासिल की।

राजदीप का दावा है कि यह किताब पूरी तरह से तटस्थ है और अनावश्यक रूप से किसी की सकारात्मक या नकारात्मक छवि पेश नहीं करती है। ग़ौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बारे में भी एक किताब ”2014: वह चुनाव जिसने भारत को बदल दिया” लिखी थी और नई किताब उसी की सीक्वल है। किताब बुनियादी तौर पर दो दिशाओं यानी राजनीति और पत्रकारिता पर बात करती है। यह किताब ऐमज़ॉन पर भी उपलब्ध है। प्रसिद्ध प्रकाशक हार्पर कॉलिंस ने प्रकाशित किया है। इस दिलचस्प किताब की क़ीमत पांच सौ रुपये के क़रीब है।

(फ़ैसल फ़ारूक़ मुंबई में रह रहे जर्नलिस्ट और स्तंभकार हैं)

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