राम मंदिर के लिए ट्रस्ट के सदस्य को लेकर उठापटक शुरू

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अयोध्या: राममंदिर निर्माण के लिए नवगठित रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर सूर्योदय के साथ उभरे विवाद के स्वर सूर्यास्त के साथ थम गए। पहले केंद्रीय सरकार के प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय नेताओं ने मोर्चा संभाला। फिर महंत कमलनयनदास की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर हुई सीधी वार्ता के बाद महंत नृत्य गोपालदास समेत सभी संतों की नाराजगी दूर हो गई। इसके साथ ही ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के लिए भी रेस शुरू हो गई है। इसमें सबसे ऊपर महंत नृत्य गोपाल दास का नाम चल रहा है।अयोध्या के साधु-संतों से लेकर विश्व हिंदू परिषद की तरफ से उम्मीद जाहिर की जा रही है ट्रस्ट का अध्यक्ष पद महंत नृत्य गोपाल दास को दिया जा सकता है।बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ट्रस्ट बनाने की घोषणा करने के साथ ही कहा कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के गठन का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। इसके लिए विस्तृत योजना तैयारी की गई है। उन्होंने कहा कि 67 एकड़ जमीन ट्रस्ट को दी जाएगी जबकि पांच एकड़ जमीन मजिस्द के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित की जाएगी।राम मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्‍ट की स्थापना से संबंधित गजट नोटिफ‍िकेशन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जारी कर द‍िया है। ट्रस्ट के पंजीकृत कार्यालय का पता आर-20, ग्रेटर कैलाश पार्ट-एक, नई दिल्ली-110048 है।बता दें कि इस ट्रस्ट में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अभी तक जगह नहीं मिली है.

हालांकि मंदिर ट्रस्ट की डीड के अनुच्छेद 9 और 10 में यह व्यवस्था है कि ट्रस्टी बहुमत से 2 गणमान्य हिंदुओं को ट्रस्ट में सदस्य के रूप में नामित कर सकते हैं. महंत नृत्य गोपाल दास को इसी मार्फत से ट्रस्ट में लाया जा सकता है.महंत नृत्य गोपाल दास साधुओं के एक बहुत बड़े तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन एक धड़ा इनका विरोधी भी है. ऐसे में सरकार किसी को नाराज नहीं करने का जोखिम नहीं लेना चाहती. महंत नृत्य गोपाल दास और विश्व हिंदू परिषद को ट्रस्ट में शामिल नहीं किए जाने से सरकार पर पक्षपात के आरोप से भी बच सकती है.अगर ट्रस्ट में महंत नृत्य गोपाल दास को शामिल करते तो कई और अखाड़े अपनी मांग भी कर सकते थे. यही वजह है कि इसे गैर राजनीतिक रखा गया है. जिन 2 जगतगुरु को शामिल किया गया है वे अयोध्या में नहीं रहते हैं और साधुओं की राजनीति से उनका कोई खास संबंध नहीं है.

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