गोगोई ने राज्यसभा जाने पर दिया बड़ा बयान,साथी जस्टिस कुरियन ने किया पलटवार

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा में नामित करने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. इन सवालों के पीछे उनके अयोध्या और राफेल मामलों पर सुनाए गए फैसले हैं. आपको बता दें कि रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं जिन्होंने उस समय के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके पर पक्षपात के आरोप लगाए थे. इसके बाद रंजन गोगोई एक तरह से नायक बनकर सामने आए क्योंकि माना जा रहा था कि इसके बाद वह देश का प्रधान न्यायाधीश बनने का मौका खो सकते हैं. इन चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक तरह से मोदी सरकार को भी लपेट रही थी और यह पीएम मोदी के आलोचकों के लिए एक तरह से हथियार साबित हुई. जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होते होने के बाद रंजन गोगोई ही देश के प्रधान न्यायाधीश बने. लेकिन अयोध्या और राफेल से जुड़े दो मामलों में उनकी अगुवाई में दिए गए फैसले विपक्ष को रास नहीं आए और उनके कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट बहुत ही कम या शायद ही किसी टिप्पणी या फैसले में मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बना हो. ऐसे में उनका राज्यसभा में जाना लाजिमी है कि सवालों के घेरे में है।
ऐसे में रंजन गोगोई ने कहा कि शायद मैं कल दिल्ली जाऊंगा। पहले मुझे शपथ ले लेने दीजिए फिर मैं मीडिया से विस्तार में बात करूंगा कि मैंने ये क्यों स्वीकार किया और मैं राज्यसभा क्यों जा रहा हूं। रंजन गोगोई को नामित किए जाने के बाद कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला, कपिल सिब्बल और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़े किए हैं तो पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने उम्मीद जताई कि गोगोई इस प्रस्ताव को ठुकरा देंगे। हालांकि, रंजन गोगोई मीडिया से बातचीत में पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रपति के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर कहा कि न्यायमूर्ति गोगोई राज्यसभा जाने की खातिर सरकार के साथ खड़े होने और सरकार एवं खुद की ईमानदारी के साथ समझौता करने के लिए याद किए जाएंगे। वैसे, यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि रंजन गोगोई 12 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य सीनियर जजों के सात संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के तौर-तरीकों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल खड़े करके चर्चा में आए थे। इसके बाद वह चीफ जस्टिस बने और राम मंदिर से लेकर सबरीमाला सहित तमाम मामलों में ऐतिहासिक फैसले दिए.
इधर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा राज्यसभा सीट स्वीकार करने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जस्टिस कुरियन ने कहा,”12 जनवरी 2018 को हम तीनों के साथ न्यायमूर्ति रंजन गोगोई द्वारा दिया गया बयान “हमने राष्ट्र के लिए अपने ऋण का निर्वहन किया है।”मुझे आश्चर्य है कि न्यायमूर्ति रंजन गोगोई जिन्होंने एक बार न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए दृढ़ विश्वास और साहस का परिचय दिया था, उन्होंने कैसे न्यायपालिका, की स्वतंत्रता पर निष्पक्ष सिद्धांतों और न्यायपालिका की निष्पक्षता से समझौता किया है।जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन लोकुर ने जनवरी 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कुछ विशिष्ट बेंचों को महत्वपूर्ण मामलों के मनमाने आवंटन का आरोप लगाया था।

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