भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र के बीच अब All is well

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नई दिल्ली :भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की 19 नवंबर की बैठक प्रस्तावित है। लेकिन इससे पहले ही सरकार और केंद्रीय बैंक कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक यह प्रयास दोनों ओर से हो रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष मतभेद के दो अहम मुद्दों – लिक्विडिटी तथा क्रेडिट मामले – पर हल तलाश करने के करीब पहुंच चुके हैं. सूत्रों का कहना है कि बोर्ड बैठक के दौरान RBI गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफा दे देने, जैसी अटकलें पिछले कुछ दिनों से मीडिया में चल रही हैं, की संभावना नहीं है. इसके साथ ही धारा-7 के भी इस्तेमाल करने के आसार नहीं है. आपको बता दें कि कुछ हफ्तों से पहले ही केंद्र सरकार की ओर से आरबीआई पर कर्ज के मामलों में नियमों में ढील और अतिरिक्त पैसा को सौंपने के लिए दबाव बना रही है. वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार केंद्रीय बैंक का 1 लाख करोड़ रुपया जो रिजर्व रखा है उसको पाना चाहती है क्योंकि ताकि वह वित्तीय घाटे को पूरा कर इसका चुनाव में इस्तेमाल कर सके. कांग्रेस का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार नोटबंदी की ‘त्रासदी’ पर पर्दा डालने और चुनावी मौसम में रेवड़ियां बांटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का खजाना लूटने को उतारू है.

सरकार का मानना है कि 12 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाला एमएसएमई क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नोटबंदी तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद काफी प्रभावित हुआ है और इसे समर्थन की जरूरत है। हालांकि, केंद्रीय बैंक एमएसएमई तथा एनबीएफसी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह इन्हें संवेदनशील क्षेत्र मानता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले सप्ताह कहा था कि एनपीए को कम से कम करने की जरूरत है। ताकि बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को कायम रखा जा सके जिससे यह अर्थव्यवस्था की वृद्धि में मदद दे सके।
केंद्र सरकार से जुड़े करीबी सूत्रों की मानें तो पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के बीच मुलाकात भी हुई थी. इसके बाद ही केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच जारी विवाद को खत्म करने की कोशिशें शुरू की गईं. सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच इस विवाद को सुलझाने को लेकर एक फॉर्मूला भी तय हुआ है.

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