RBI और केंद्र के बीच तनाव कम होने के आसार ,राहुल ने ली चुटकी

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नई दिल्ली :भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की बहुप्रतीक्षित बैठक देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जारी है। इस बैठक में केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इसके आसार नहीं दिख रहे। बोर्ड की बैठक में कुल 19 प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। बैठक में सर्वाधिक तल्खी आरबीआई से बड़ा डिविडेंड देने की मांग को लेकर सामने आई है। इसी बीच केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच चल रही तनातनी पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है कि उर्जित की टीम हिम्मत करके पीएम को उनकी जगह दिखाएगी।राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, ‘मिस्टर मोदी और उनकी मंडली के सदस्य लगातार हर उस संस्थान को खत्म कर रहे हैं जो उनके हाथ में है। आज आरबीआई की बोर्ड बैठक में अपनी कठपुतलियों के जरिए आरबीआई को खत्म करने की कोशिश की जाएगी। मैं उम्मीद करता हूं कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और उनकी टीम कुछ हिम्मत करेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनकी जगह दिखाएगी।इसी बीच सूत्रों का यह कहना है कि बैठक में दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति पर पहुंचने के पक्ष में हैं। टकराव के सार्वजनिक होने के बाद बोर्ड की यह पहली बैठक है। सरकारी अधिकारियों और भाजपा से जुड़े लोगों का कहना है कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और सरकार किसानों की कम आय, रोजगार की संख्या में कमी को लेकर परेशान है।सोमवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर लिखा, मिस्टर मोदी और उनकी मंडली, लगातार देश के संस्थानों को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं. आज आरबीआई की बैठक में अपनी कठपुतलियों के द्वारा वह इसकी कोशिश करेंगे. मुझे लगता है कि उर्जित पटेल और उनकी टीम प्रधानमंत्री को उनकी जगह दिखाएगी.बता दें की रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और केन्द्रीय बैंक के सभी डिप्टी गवर्नरों की बोर्ड में सरकार द्वारा मनोनीत निदेशकों, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार और स्वतंत्र निदेशक एस गुरुमूर्ति के साथ विवादित मुद्दों पर कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए आमने -सामने बातचीत हुई। लगभग नौ घंटे तक चली बैठक के बारे में हालांकि, आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। सरकार और गुरुमूर्ति ने केंद्रीय बैंक पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अधिक नकदी उपलब्ध कराने, छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज नियमों को उदार करने, कमजोर बैंकों के लिए नियमों में ढील देने और रिजर्व बैंक के आरक्षित कोष में से कुछ राशि अर्थव्यवस्था को प्रोत्सोहन को देने के लिए उपलब्ध कराने को लेकर दबाव बनाते रहे।
बैठक में संभवत: रिजर्व बैंक के पास उपलब्ध भारी भरकम 9.69 लाख करोड़ रुपये के आरक्षित कोष पर भी चर्चा हुई। गुरुमूर्ति और वित्त मंत्रालय चाहते हैं कि केन्द्रीय बैंक के पास उपलब्ध आरक्षित कोष की सीमा को वैश्विक स्तर के अनुरूप कम किया जाना चाहिये। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन सहित रिजर्व बैंक के 10 स्वतंत्र निदेशकों में से अधिकतम स्वतंत्र निदेशक बैठक में शामिल हुए। बैठक पर मीडिया और बाजार की कड़ी निगाह बनी रही।

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