आखरी वक़्त में RCEP समझौते से पीएम मोदी ने भारत को किया अलग

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बैंकाक:भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। सूत्रों से यह जानकारी मिली है। समझौते में पीएम मोदी की प्रमुख चिंताओं को शामिल नहीं किया गया, इसलिए कहा गया कि भारत अपने कोर हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। आरसीईपी (RCEP) समझौता इसकी मूल मंशा को नहीं दर्शाता है। र‍िजल्‍ट उचित या संतुलित नहीं है। भारत की प्रमुख चिं‍ताओं में शामिल है – आयात वृद्धि के खिलाफ अपर्याप्त सुरक्षा, चीन के साथ अपर्याप्त अंतर, उत्पत्ति के नियमों की संभावित ढकोसला, 2014 के रूप में आधार वर्ष को ध्यान में रखते हुए और बाजार पहुंच व गैर टैरिफ बाधाओं पर कोई विश्वसनीय आश्वासन नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि हमारे किसानों, व्यापारियों और उद्योगों का काफी कुछ दांव पर है. कर्मचारी और उपभोक्ता हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. पीएम ने कहा कि आज जब हम आरसीईपी के 7 वर्षों के वार्ता को देखते हैं तो वैश्विक आर्थिक और व्यापार परिदृश्य सहित कई चीजें बदल गई हैं. हम इन परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं. मौजूदा आरसीईपी समझौता आरसीईपी की मूल भावना को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता है.

दरअसल आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो कि सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में कई सहूलियत देगा. इसके तहत निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं देना पड़ेगा या तो बहुत कम देना होगा. इसमें आसियान के 10 देशों के साथ अन्य 6 देश हैं.RCEP में भारत के शामिल होने के खिलाफ किसान देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. खासकर किसान संगठनों कड़ी आपत्ति जता रहे थे. किसानों का कहना है कि ये संधि होती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को इनके उत्पाद का जो मूल्य मिल रहा है, उसमें गिरावट आ जाएगी.

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