मैं भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहा हूं:सचिन पायलट

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राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने बगावत करने वाले वरिष्ठ नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) के खिलाफ कार्रवाई की, जिन्होंने राज्य की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार को गिराने की कगार पर पहुंचा दिया है. 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की गहलोत सरकार के पास बहुमत से कम 100 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है. आज, कांग्रेस ने सरकार और पार्टी में सभी पदों से उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को हटा दिया. इसके साथ-साथ उनका समर्थन करने वाले दो मंत्रियों को भी सरकार से बाहर का रास्ता दिखा गया. हालांकि न तो पायलट को और न उनके समर्थकों को पार्टी से बाहर किया गया है.
इस बीच बड़ी खबर यह है की सचिन पायलट ने कहा है की मैं अशोक गहलोत से नाराज नहीं, मैंने उनसे कोई खास ताकत भी नहीं मांगी थी.उन्होंने कहा मैं चाहता था कि जनता से किए वादे पूरे हों,राजस्थान में मैंने 5 साल तक कड़ी मेहनत की, सत्ता में आने पर गहलोत ने कुछ नहीं दिया। उन्होंने कहा की मैं अशोक गहलोत से नाराज नहीं हूं और ना ही किसी तरह की कोई स्पेशल शक्ति मांग रहा हूं. मैं बस इतना चाहता हूं कि कांग्रेस की सरकार राजस्थान में लोगों को किए हुए वादे को पूरा करे जो चुनाव के दौरान किए गए थे. हमने चुनाव में वसुंधरा राजे की सरकार के खिलाफ प्रचार किया, जिसमें अवैध माइनिंग का मसला था लेकिन सत्ता में आने के बाद अशोक गहलोत जी ने कुछ नहीं किया और उसी रास्ते पर चल पड़े. पिछले साल राजस्थान हाई कोर्ट ने एक पुराने फैसले को पलटते हुए वसुंधरा राजे को बंगला खाली करने को कहा, लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने फैसले पर अमल करने की बजाय इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी.अशोक गहलोत एक तरफ तो पूर्व मुख्यमंत्री की मदद कर रहे हैं और दूसरी तरफ मुझे और मेरे समर्थकों को राजस्थान के विकास में काम करने की जगह नहीं दे रहे हैं. अफसरों को कहा गया कि मेरे आदेश ना मानें, मुझे फाइलें नहीं भेजी जा रही थीं. महीनों तक विधायक दल या कैबिनेट की बैठक नहीं होती है. ऐसे पद का क्या फायदा अगर मैं लोगों को किया गया वादा ही ना पूरा कर सकूं.

मैंने कई बार इन मसलों को सभी के आला कमान के सामने रखा है. मैंने प्रभारी अविनाश पांडे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात की, खुद अशोक गहलोत से इस मसले पर बात की है. लेकिन जब मंत्रियों और विधायकों की बैठक ही नहीं होती थी, तो बहस और बातचीत की जगह ही नहीं बची थी.सचिन ने कहा की
जरा माहौल को शांत होने दीजिए..अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं. मैं अभी भी कांग्रेस कार्यकर्ता हूं. मुझे अपने समर्थकों के साथ अपने कदम पर चर्चा करनी है.
मैं पहले ही साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहा हूं. मैं अभी यही कहना चाहता हूं कि मैं अपने लोगों के लिए काम करता रहूंगा.
मैं किसी बीजेपी नेता से नहीं मिला हूं. पिछले 6 महीने से ज्योतिरादित्य सिंघिया से नहीं मिला हूं और ना ही ओम माथुर से मिला हूं.
सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मेरी कोई बात नहीं हुई. प्रियंका गांधी ने मुझसे बात की थी, लेकिन वो निजी तौर पर चर्चा थी. उससे कोई हल नहीं निकला.मैंने ऐसी कोई मांग नहीं रखी है. मैंने सिर्फ यही चाहा है कि आत्मसम्मान के साथ काम करने की जगह मिल सके, जो मुझसे वादा किया गया था. मैं फिर कहना चाहता हूं कि ये सत्ता की बात नहीं है, ये आत्मसम्मान की बात है.

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