कांग्रेस ने अपने सीनियर नेता और पूर्व सांसद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया

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नई दिल्ली :मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बागियों पर ऐक्शन तेज कर दिया है। वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी को आखिरकार कांग्रेस ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। नामाकंन की अंतिम तारीख तक कांग्रेस ने 17 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया है। पार्टी के प्रवक्ता और महासचिव रहे सत्यव्रत ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बगावत की थी। बता दें कि सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड रहे हैं. इसके लिए हाल ही में उन्‍होंने बेटे के लिए वोट भी मांगे. उन्‍होंने कहा कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाना चाहते हैं. दूसरी पार्टी के चुनाव प्रचार करने के आरोपों के बाद कांग्रेस ने सत्‍यव्रत चतुर्वेदी को बाय बोल दिया है.हालांकि तब सत्यव्रत ने सफाई देते हुए कहा कि मैंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है और न ही कांग्रेस की विचारधारा। अगर कांग्रेस ने 15 साल तक कोई गलती की और उस गलती को दोहराया जा रहा है तो अन्याय करना जितना बड़ा पाप है उतनी ही बड़ा पार अन्याय सहना भी है। सत्यव्रत चतुर्वेदी संभाग के बड़े ब्राह्मण नेता हैं। वे मध्यप्रदेश में विधायक, मंत्री और सांसद रह चुके हैं। ऐसे में उनके अपने बेटे के समर्थन में उतर आना कांग्रेस के प्रचार अभियान को नुकसान पहुंचा सकता था। नितिन चतुर्वेदी ने राजनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। नितिन चतुर्वेदी कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे थे लेकिन निराशा हाथ लगी। बता दें की उन्होंने साफ कहा था कि वह अपने बेटे के लिए प्रचार करेंगे। कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं माने। खुद पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनके इस फैसले पर दुख जताया था। नामांकन की तारीख निकलने के बाद से अब तक कांग्रेस 17 लोगों को पार्टी से निकाल चुकी है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के 8 नेता दूसरे दलों से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि करीब एक दर्जन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

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