भुखमरी की नई रिपोर्ट में मोदी सरकार को बड़ा झटका,पाकिस्तान से 8 पायदान नीचे पहुंचा भारत

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नई दिल्ली :दुनिया में पांच साल से कम उम्र के करीब 70 करोड़ बच्चों में एक तिहाई या तो कुपोषित हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं। इसके चलते उन पर जीवन पर्यन्त स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त रहने का खतरा मंडरा रहा है। मंगलवार को जारी हुई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया में 80 करोड़ से ज्यादा आबादी भुखमरी से पीड़ित है।यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोरे ने ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि इंसान स्वस्थ रहने के लिए बेहतर खानपान की लड़ाई हार रहा है। वर्ष 1999 के बाद आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में से करीब आधे बच्चों को आवश्यक विटामिन और खनिज नहीं मिल पा रहे हैं।
2015 में भारत की ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) रैंकिंग 93 थी। उस वर्ष दक्षिण एशिया में सिर्फ पाकिस्तान ही ऐसा देश था जो इस इंडेक्स में भारत से नीचे आया था। वह इस वर्ष भारत से आगे निकलकर 94वां स्थान हासिल किया है। 2014 से 2018 के बीच जुटाए गए आंकड़ों से तैयार ग्लोबल हंगर इंडेक्स विभिन्न देशों में कुपोषित बच्चों की आबादी, उनमें लंबाई के अनुपात में कम वजन या उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले पांच वर्ष तक के बच्चों का प्रतिशत और पांच वर्ष तक के बच्चे की मृत्यु दर पर आधारित हैं।

आंकड़े बताते हैं कि भारत के कारण जीएचआई में दक्षिण एशिया की स्थिति अफ्रिका के उप-सहारा क्षेत्र से भी बदतर हो गई। जीएचआई पर पेश एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में 6 से 23 महीनों के सिर्फ 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकृत भोजन उपलब्ध हो पाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट में तो यह आंकड़ा 6.4% ही बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद से नेपाल ने इस मामले में सबसे ज्यादा सुधार किया है।भूख की स्थिति के आधार पर देशों को 0 से 100 अंक दिए गए और जीएचआई तैयार किया गया। इसमें 0 अंक सर्वोत्तम यानी भूख की स्थिति नहीं होना है। 10 से कम अंक का मतलब है कि देश में भूख की बेहद कम समस्या है। इसी तरह, 20 से 34.9 अंक का मतलब भूख का गंभीर संकट, 35 से 49.9 अंक का मतलब हालत चुनौतीपूर्ण है और 50 या इससे ज्यादा अंक का मतलब है कि वहां भूख की बेहद भयावह स्थिति है।

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