संयुक्त राष्ट्र ने जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद को दिया तगड़ा झटका

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नई दिल्ली:आतंकवाद को मदद देने के मुद्दे पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा मुश्किल में पड़ता दिख रहा है। एक तरफ जहां संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील देने से साफ इन्कार कर दिया है तो दूसरी तरफ ब्रिटेन ने भारत से साफ तौर पर कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह हरसंभव मदद करेगा।संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद को उस समय झटका दिया है, जब जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकी की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया. यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद यूएन की 1267 सैंक्शन कमेटी को दिया गया है.

पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले की जिम्मेदारी खूंखार आतंकी संगठन ने ली थी. इसके बाद भारत ने जवाब कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक की थी.सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि भारत द्वारा सबूत उपलब्ध कराने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के सरगना हाफिज सईद के नाम को वैश्विक आतंकियों की सूची से हटाने की अपील को खारिज किया है. यूएन ने अपने इस फैसले की जानकारी हाफिज सईद के वकील हैदर रसूल मिर्जा को भी दे दी है.

साल 2017 में आतंकी सईद ने लाहौर की लॉ फर्म मिर्जा एंड मिर्जा के जरिए संयुक्त राष्ट्र में अपनी यह अपील दायर की थी. फिलहाल सईद को पाकिस्तान में नजरबंद रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद की अपील की जांच करने के लिए स्वतंत्र ओम्बड्समैन डेनियर किफर फैसिएटी  को नियुक्त किया था. ओम्बड्समैन ने मामले की जांच करने के बाद हाफिज सईद के नाम को वैश्विक आतंकी की सूची से नहीं हटाने की सिफारिश की. इसके अलावा भारत समेत अन्य देशों ने भी हाफिज सईद के नाम को वैश्विक आतंकी की सूची से हटाने का विरोध किया. वहीं, नए पाकिस्तान का दावा करने वाली इमरान खान सरकार ने हाफिज सईद की अपील का विरोध नहीं किया.

सूत्रों ने बताया कि स्वतंत्र लोकपाल डेनियल किपफर फासियाटी ने सईद के वकील को सूचित किया है कि उसके अनुरोध के परीक्षण के बाद यह फैसला किया गया है कि वह ‘सूचीबद्ध व्यक्ति के तौर पर बरकरार’ रहेगा. संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे सभी अनुरोधों के परीक्षण के लिए डेनियल की नियुक्ति की है. उन्होंने बताया कि लोकपाल ने सिफारिश की कि सारी सूचनाएं इकट्ठा करने के बाद यह तय किया गया है कि पाबंदी जारी रहेगी, ‘क्योंकि (प्रतिबंध) सूची में बनाए रखने के लिए एक तार्किक एवं विश्वसनीय आधार प्रदान करने के लिए पर्याप्त सूचनाएं हैं.’

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