देवबन्द की पहली महागठबंधन की रैली ने साम्प्रदायिक ताक़तों की चूलें हिलाई

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देवबन्द से तौसीफ़ क़ुरैशी
देवबन्द।देवबन्द की पहली महागठबंधन की रैली ने साम्प्रदायिक ताक़तों की चूलों को हिला दिया है इस रैली में आई भीड़ ने ये साबित कर दिया है कि देश का बहुत बड़ा तबक़ा मोदी की भाजपा के कुशासन के खिलाफ वोट करने जा रहा है महागठबंधन की इस रैली में आई भीड़ में हर जाति धर्म के लोगों के शामिल होने से एक बात तो साफ हो गई कि देश की जनता अब साम्प्रदायिकता के नाम पर वोट माँगने वालों को सबक़ सिखाने जा रही है रैली में आई भीड़ में से हमने लोगों से बात करने की कोशिश की कैराना लोकसभा सीट से आए किसान चौधरी ओमकार, कालीचरण , चौधरी आदेश कुमार , रवीन्द्र चौधरी , अन्नत कुमार , धीरज सिंह , अवतार सिंह , करमवीर सिंह व बालेन्दु कुमार का कहना था कि मोदी-योगी की दोनों सरकारें जनता को और किसानों को सिर्फ़ धर्म के नाम पर छलने का काम कर रही है और इस तरह की छलकपट से कुछ दिन ही बेवक़ूफ़ बनाया जा सकता है न कि हमेशा न युवाओं को रोज़गार न किसानों का गन्ना भुगतान हो रहा है .

दस हज़ार करोड़ रूपया आज भी किसानों का गन्ना बक़ाया चल रहा है और जब ये पार्टी सत्ता में नही थी तो किसानों को गन्ना बक़ाया दस दिनों में देने की बात करती थी व किसानों की आय बढ़ाने की बात करती बढ़ना तो दूर बल्कि किसान की आय घट गई अब ये साम्प्रदायिक पार्टी मुद्दों से भाग रही है इस लिए हिन्दू-मुसलमान और राष्ट्रवाद की बात कर रही है जो बिलकुल गलत है राष्ट्रवाद की बात जब होगी तो देश का हर नागरिक राष्ट्रवाद के लिए आगे आएगा उसमें कोई हिन्दू-मुसलमान नही होता यह सब इनकी सियासत का खेल है जिसे हमें समझना होगा।सहारनपुर लोकसभा सीट की बेहट, रामपुर मनिहारान , सहारनपुर नगर ,सहारनपुर देहात विधानसभाओ से बडी संख्या में लोगों से बात की गई जिसमें मौहम्मद अलाउद्दीन , करीमुउद्दीन अहमद , सदाक़त अली , शहज़ाद अहमद , रहीस अहमद, ख़लील खान ,ख़ालिक़ अहमद, जफीरूद्दीन अली , सईद अहमद , अहसान अहमद , फय्याज अली , नौसाद अहमद , शमशाद खान ,फ़िरोज़ सलमान ,राशिद सलमानी ,रहमान अब्बासी , अताउर्रहमान खान , रहीमबख्श , शम्सुद्दीन मलिक , रहीस मलिक, फ़ैसल मलिक , नय्यर अली , कमालुद्दीन अली मौहम्मद युसुफ ,मौ. अख़लाक़ ,मौहम्मद शहज़ाद, रहमइलाही , फ़राज़ सिद्दीक़ी , रहमान अंसारी , ख़ालिद अंसारी , शहज़ाद अंसारी , फ़ैसल अंसारी , सदाक़त गाड़ा सहित अधिकांश लोगों का तर्क था कि हमारा वोट गठबंधन को ही जाएगा कोई कुछ भी कहे हम गठबंधन के साथ है.

फिलहाल देश को बचाने व उसके संविधान को बचाना है न कि कुछ और हा कुछ लोग मुसलमान को बहकाने में लगे है जिसमें मोदी-योगी भी यही चाहते है कि मुसलमान बँट जाए और साम्प्रदायिक ताकते मजबूत हो जाएगी जिसे हम मजबूत नही होने देंगे अपने सेकुलर हिन्दु भाईयों के साथ मिलकर उनको गठबंधन ही हरा सकता है और दूसरा कोई नही है अगर कोई दूसरा इस तरह की बात कर रहा है तो वह मोदी की भाजपा को जिताने की बात कर रहा है हमें ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा क्योंकि कोई बिरादरी की बात करेगा कोई कयादत की बात करेगा ये सब वाहीयात बातें है फिलहाल कुछ नही सिर्फ़ और सिर्फ़ गठबंधन की बात करनी चाहिए बाक़ी बाद में देखा जाएगा जब हम रहेंगे तभी तो कयादत या कुछ और रहेगा जब हम ही नही रहेंगे तो क्या करेगे इस फ़र्ज़ी कयादत का कयादत की बात करने वाले एक बात का जवाब नही दे सकते.

चालीस साल से आपकी कयादत चल रही है आज तक कोई एक इंटर कालेज की स्थापना की हो उसका नाम और जगह बता दो तो हम मान जाएँगे कि आप सच्चे कायद हो ये सब मुसलमान के नाम पर अपना धंधा चला रहे है हमें इसमें भी कोई दिक़्क़त नही है चलाए और चलाते भी आए है लेकिन हमने कुछ नही कहा कि तुम हमें बेच रहे हो बेचते रहे लेकिन आज ऐसे हालात नही है कि हम पूर्व की तरह बिकते रहे आज हमें देश को बचाना है संवीधान को बचाना है ये कुछ नही है।वैसे देखा जाए तो रैली ने इतनी बड़ी लकीर खींच दी है कि बाक़ी राजनीतिक दलों को इस रैली को फीका करना आसान नही बल्कि नामुमकिन कहा जा सकता है, मायावती अखिलेश और अजित सिंह की इस रैली ने अब तक हुई सहारनपुर की तमाम रैलियों को बहुत पीछे छोड़ दिया है,लाखों की तादाद में जुटी भीड़ ने साबित किया कि गठबंधन उम्मीदवार चुनाव को मजबूती से लड़ रहे हैं, और उनको मोदी विरोधी वोट मिल रहे है चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान सब एक जुट होकर लगे है।

गठबंधन नेताओ ने जहां एक तरफ भाजपा को अपने निशाने पर रखा वहीं कांग्रेस पर भी हमलावर रहे और ये कहने से भी नही चुके की कांग्रेस और भाजपा इस लड़ाई में एक साथ हैं और अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं, मोदी की भाजपा और मोदी की सत्ता को देश भर से हटाने के लिए जनता से समर्थन मांगा गया और गठबंधन की सरकार के लिए आह्वान किया गया,रैली में जहां मुसलमानों की जबरदस्त भागीदारी नज़र आई वहीं दलितों और हिन्दू वोटर्स की भागीदारी भी रिकार्डतोड़ नज़र आई,इस भीड़ को वोटों में बदलने के लिए हर नेता ने अपना हर ज़ुबानी पैंतरा इस्तेमाल किया अब ये अलग बात है कि गठबंधन नेता अपने इस पैंतरे में कितना कामयाब होंगे , मगर ये बात तो तय नज़र आई कि भीड़ के मामले में इस रैली ने पीएम मोदी औऱ सीएम योगी की जनसभाओं को तो बहुत पीछे छोड़ दिया है,अब कांग्रेस नेताओं के लिए कल होने वाली राहुल गांधी की रैली को कामयाब करना और इससे बड़ी रैली कर दिखाना भी एक बडी चुनौती होगी और इस चुनौती को कांग्रेस नेता कैसे कर पाएंगे ये देखने वाली बात होगी।

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