सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा ”मैं लाचार हूं”

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नई दिल्ली :सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर मामले में 13 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। सीबीआइ की विशेष अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सभी गवाहों और सबूतों को असंतोषजनक करार देते हुए यह फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ को फर्जी मानने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात को माना है कि सोहराबुद्दीन की मौत गोली लगने के कारण ही हुई थी. हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है. यही कारण है कि सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार और एजेंसियों ने इस केस की जांच करने में काफी मेहनत की, 210 गवाहों को पेश किया गया. लेकिन किसी भी तरह से सबूत सामने नहीं आ सके. जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि असहाय हैं.

बताते चलें कि 2005-06 के दौरान हुए इस एनकाउंटर में इस कथित गैंगस्टर सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति के मारे जाने से राजनीति काफी गर्मा गई थी. अब 13 साल बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. इस मामले की आखिरी बहस 5 दिसंबर को खत्म हुई थी.अदालत ने कहा कि तुलसीराम प्रजापति की एक षड्यंत्र के तहत हत्या करने का आरोप सच नहीं है। सरकारी मशीनरी और अभियोजन पक्ष ने बहुत सारे प्रयास किए। 210 गवाह पेश किए गए लेकिन संतोषजनक सबूत नहीं आए और गवाह पूर्व में दिए अपने बयानों से पलट गए। यदि गवाह नहीं बोलते हैं तो इसमें अभियोजक की कोई गलती नहीं है। गवाहों के पलटने पर जज एसजे शर्मा ने कहा, ‘मैं लाचार हूं।’

साल 2005 के इस मामले में 22 लोग मुकदमे का सामना कर रहे थे जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं। इस मामले पर विशेष निगाह रही है क्योंकि आरोपियों में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का नाम भी शामिल था। हालांकि, उन्हें 2014 में आरोप मुक्त कर दिया गया था। शाह इन घटनाओं के समय गुजरात के गृह मंत्री थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए। इस महीने की शुरूआत में आखिरी दलीलें पूरी किए जाने के बाद सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश एस जे शर्मा ने कहा था कि वह 21 दिसंबर को फैसला सुनाएंगे। ज्यादातर आरोपी गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी हैं। अदालत ने सीबीआई के आरोपपत्र में नामजद 38 लोगों में 16 को सबूत के अभाव में पहले ही आरोपमुक्त कर दिया था। इनमें अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पी सी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं।

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