गोडसे ने बापू को गोली क्यों मारी थी ?

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नई दिल्ली :आज 30 जनवरी को पूरा देश जब बापू की शहादत पर मातम मना रहा होता है तो एक तबका ऐसा भी है जो बापू को भुलाकर उस शख्स के महिमामंडन में लगा होता है जिसने बापू के सीने में गोलियां उतारी थीं. उस शख्स का नाम था नाथूराम गोडसे.नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी के उस फैसले के खिलाफ था जिसमें वह चाहते थे कि पाकिस्तान को भारत की तरफ से आर्थिक मदद दी जाए. इसके लिए बापू ने उपवास भी रखा था. उसे यह भी लगता था कि सरकार की मुस्लिमों के प्रति तुष्टीकरण की नीति गांधीजी के कारण है. नाथूराम गोडसे का मानना था कि भारत के विभाजन और उस समय हुई साम्प्रदायिक हिंसा में लाखों हिन्‍दुओं की हत्या के लिए महात्मा गांधी जिम्मेदार थे. गोडसे ने दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में बापू की हत्या की थी. 30 जनवरी 1948 की शाम नाथूराम गोडसे बापू के पैर छूने बहाने झुका और फिर बैरेटा पिस्तौल से तीन गोलियां दाग कर उनकी हत्या कर दी थी.

जब महात्मा गांधी के बेटे देवदास नाथूराम गोडसे से जेल में मिलने पहुंचे तो गोडसे ने उनसे कहा था कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु का मुझे बहुत दुख है. नाथूराम ने देवदास गांधी से कहा, मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूं. आज तुमने अपने पिता को खोया है. मेरी वजह से तुम्हें दुख पहुंचा है. तुम पर और तुम्हारे परिवार को जो दुख पहुंचा है, इसका मुझे भी बड़ा दुख है. कृपया मेरा यकीन करो, मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते नहीं किया है, ना तो मुझे तुमसे कोई द्वेष है और ना ही कोई खराब भाव.

नाथूराम गोडसे ने 8 नवम्‍बर 1948 को 90 पेज का बयान कोर्ट के सामने पढ़ा. नाथूराम गोडसे ने कहा था कि मैंने वीर सावरकर और गांधी जी के लेखन और विचार का गहराई से अध्‍ययन किया है. चूंकि मेरी समझ में पिछले तीस सालों में भारतीय जनता की सोच और काम को किसी भी और कारकों से ज्‍यादा इन दो विचारों ने गढ़ने का काम किया है. इन सभी सोच और अध्‍ययन ने मेरा विश्‍वास पक्‍का किया कि बतौर राष्‍ट्रभक्‍त और विश्‍व नागरिक मेरा पहला कर्तव्‍य हिन्‍दुत्‍व और हिन्‍दुओं की सेवा करना है. 32 सालों से इकट्ठा हो रही उकसावेबाजी, नतीजतन मुसलमानों के लिए उनके आखिरी अनशन ने आखिरकार मुझे इस नतीजे पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया कि गांधी का अस्तित्‍व तुरंत खत्‍म करना ही चाहिए.

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