युवराज सिंह ने भारतीय टीम मैनेजमेंट पर लगाया बड़ा आरोप

0
25

नई दिल्ली :पूर्व भारतीय बल्लेबाज युवराज सिंह ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम पड़ाव में टीम मैनेजमेंट ने उन्हें निराश किया और अगर उन्हें पूरा समर्थन मिला होता तो वह 2011 में शानदार प्रदर्शन के बाद एक और वर्ल्ड कप खेल सकते थे.युवराज ने कहा, ‘मुझे दुख होता है कि 2011 के बाद मैं एक और वर्ल्ड कप नहीं खेल सका. टीम मैनेजमेंट और इससे जुड़े लोगों से मुझे मुश्किल से ही कोई सहयोग मिला.

अगर उस तरह का समर्थन मुझे मिलता तो शायद मैं एक और वर्ल्ड कप खेल लिया होता. टीम प्रबंधन और इससे जुड़े लोगों से मुझे मुश्किल से ही कोई सहयोग मिला। अगर उस तरह का समर्थन मुझे मिलता तो शायद मैं एक और विश्व कप खेल लिया होता। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जो भी क्रिकेट मैंने खेला, वो अपने दम पर खेला। मेरा कोई ‘गॉडफादर’ नहीं था। ’’ युवराज ने कहा कि फिटनेस के लिये अनिवार्य ‘यो-यो टेस्ट’ पास करने के बावजूद उनकी अनदेखी की गयी। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन को उनसे पीछा छुड़ाने के तरीके ढूंढने के बजाय उनके कैरियर के संबंध में स्पष्ट बात करनी चाहिए था। युवराज ने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे 2017 चैम्पियंस ट्राफी के बाद आठ से नौ मैच में से दो में मैन आफ द मैच पुरस्कार जीतने के बाद मुझे टीम से बाहर कर दिया जायेगा।

मैं चोटिल हो गया और मुझे श्रीलंका श्रृंखला की तैयारी के लिये कहा गया। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अचानक ही मुझे वापस आना पड़ा और 36 साल की उम्र में ‘यो-यो टेस्ट’ की तैयारी करनी पड़ी। यहां तक कि ‘यो-यो टेस्ट’ पास करने के बाद मुझे घरेलू क्रिकेट में खेलने को कहा गया। उन्हें ऐसा लगा था कि मैं इस उम्र में इस टेस्ट को पास नहीं कर पाऊंगा। इससे उनके लिये मुझे बाहर करने में आसानी हो जाती। युवराज सिंह ने अपने इंटनैशनल करियर में 304 वनडे और 58 टी20 इंटनैशनल मैच खेले हैं, जिनमें क्रमश: 8,701 और 1,177 रन अपने नाम किए हैं। जनवरी 2017 में ही उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई घरेलू वनडे सीरीज में कटक के मैदान पर 127 बॉल में 150 रन की पारी खेली थी। युवी के वनडे करियर का यह सर्वोच्च स्कोर भी है। इसके बाद वह टीम से लगातार अंदर-बाहर होते रहे और उन्हें इंग्लैंड में आयोजित हुई चैंपियन्स ट्रोफी (2017) में खेलने का मौका मिला।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here